पुराना शहर स्थित कांकरटोला में संचालित सीमा ग्रामोद्योग संस्थान के संचालक बरकत अली ने ग्राम सनैयारानी मेवाकुंवर में धान मशीन लगाने के लिए वर्ष 1995-96 में खादी ग्रामोद्योग विभाग में आवेदन किया। आवेदक ने ऋण संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए इस गांव की जमीन गाटा नंबर 759 में से 0.405 हेक्टेयर भूमि बंधक के रूप में सौंप दी। ऋणदाता ने जब कर्जा नहीं चुकाया तो खादी ग्राम उद्योग बोर्ड ने वांछित राशि वसूली के लिए आरसी तहसील में भेज दी। तहसीलदार ने इसकी वसूली के लिए अमीन को लगाया तो पता चला कि सनैयारानी मेंवाकुंवर में जो जमीन है वो सीलिंग में दर्ज है। इसकी रिपोर्ट मिलते ही खलबली मच गई कि लोन लेने वाले ने सीलिंग जमीन को ही रहन रख दिया।
तहसीलदार सदर अंजुम खालिद ने पूरी रिपोर्ट बनाकर जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी को सौंपते हुए कहा कि मामला फ्राड है। सीलिंग जमीन होने से आरसी वसूली नहीं की जा सकती। इसकी जानकारी सक्षम प्राधिकारी नगर भूमि सीमारोपण को दी गई। सक्षम अधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला ग्रामोद्योग अधिकारी से तुरंत कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीलिंग जमीन रहन रखने वाले आवेदक बरकत अली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
इस फर्जीवाड़े से खादी बोर्ड कार्यालय में खलबली मची हुई है। विभागीय अधिकारी मामला रफा दफा करने के लिए मुख्यालय से दिशा निर्देश लेने में जुटे हुए हैं। जिला खादी बोर्ड अधिकारी नवरत्न सिंह ने बताया कि बरकत अली ने सीलिंग की जमीन बंधक रखकर लोन लिया है जो कि धोखाधड़ी में आता है। इसलिए इस ऋणदाता पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सिंह ने बताया कि ऋणदाता से 30 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली अपेक्षित है।