लापरवाही बरतने पर हुई कार्रवाई
जांच में पाया गया कि सभी सहायक अध्यापकों और कर्मचारियों के बावजूद प्रधानाध्यापिका का उन पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था, जिसके चलते स्कूल की साफ-सफाई और शैक्षणिक माहौल पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए प्रधानाध्यापिका पूनम गंगवार को अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने और विद्यालय की दुर्दशा के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पाया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
बीएसए संजय सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। यह बात सभी को साफ तौर से समझ लेनी चाहिए कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।