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भूमि अधिग्रहण घोटाला: दलाल और अधिकारी गठजोड़ फिर खुला, अब शासन की कार्रवाई पर टिकीं निगाहें

Thu, 26 Sep 2024 03:35 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली-सितारगंज हाईवे और बरेली में रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण में घोटाले के अंदेशे में अब तक तीन जांचें हुईं। इनमें यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों के लिए एलाइनमेंट की जानकारी लीक की गई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली-सितारगंज हाईवे चौड़ीकरण के भूमि अधिग्रहण घोटाले में दलाल-अधिकारी गठजोड़ फिर खुला है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इनकी मिलीभगत से जमीन की खरीद-फरोख्त की बात सामने आई है। अब शासन स्तर से होने वाली कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि मंडलायुक्त की संस्तुति पर घोटाले की न केवल विस्तृत जांच कराई जाएगी, बल्कि दोषियों पर कार्रवाई की गाज भी जल्द गिर सकती है। 

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जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक मुआवजा हासिल करने के लिए 19 बाहरी लोगों ने तब जमीन खरीदी, जब उन्हें उन गाटा संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल गई कि प्रस्तावित हाईवे कहां से होकर गुजरेगा। रिपोर्ट में इसके लिए दलालों-अधिकारियों व बाहरी लोगों के पूरे नेटवर्क को जिम्मेदार माना गया है। साथ ही, संगठित होकर सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने की बात कहते हुए विस्तृत जांच की संस्तुति की गई है।

अब तक तीन जांचें हुईं 
बरेली-सितारगंज हाईवे और बरेली में रिंग रोड के लिए भूमि अधिग्रहण में घोटाले के अंदेशे में अब तक तीन जांचें हुईं। इनमें यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों के लिए एलाइनमेंट की जानकारी लीक की गई। ऐसे लोगों ने जमीन के उसी हिस्से को खरीदा, जिसका अधिग्रहण होना था। बाद में उसी जमीन पर स्ट्रक्चर खड़े किए गए। अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अधिक मूल्यांकन कराया गया। 

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मूल्यांकन में घोटाला किए जाने का खुलासा सबसे पहले एनएचएआई दिल्ली से आई जांच टीम ने अगस्त के पहले सप्ताह में किया था। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने इसकी पुष्टि की। अब कमिश्नर की रिपोर्ट में भी इससे जुड़े तथ्य सामने आए हैं। इसलिए शासन स्तर से विस्तृत जांच के आदेश के साथ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने के आसार हैं। डीएम की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है।  

घोटाले पर एक नजर
  • 21.52 करोड़ रुपये का अधिक मूल्यांकन किए जाने की पुष्टि सीडीओ की अगुवाई वाली जांच कमेटी ने की।
  • 37,83 करोड़ रुपये अधिक भुगतान के मामले एनएचएआई मुख्यालय से आई जांच टीम ने पकड़े।
  • 58.91 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी मंडलायुक्त की ओर से गठित कमेटी ने पकड़ी।
बाहर से आए इन खरीदारों ने खरीदी जमीन
  • धर्मवीर मित्तल, बिलासपुर, रामपुर। 
  • सुनील नोसरिया, आनंद विहार, शकरपुर, पूर्वी दिल्ली।
  • राजेश कुमार, ऊधमसिंह नगर।
  • राम किशोर, ऊधमसिंह नगर।
  • रमन फुटेला, ऊधमसिंह नगर।
  • मनीषा सिंघल, ऊधमसिंह नगर।
  • अंकुर पपनेजा, ऊधमसिंह नगर।
  • साधना, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ।
  • हिमांशु, सेक्टर-ई, अलीगंज लखनऊ।
  • मनीष सिंघल, सेक्टर-137 नोएडा।
  • बबिता रानी, ऊधमसिंह नगर।
  • सीमा रानी, ऊधमसिंह नगर।
  • नवीन खेड़ा, ऊधमसिंह नगर।
  • राजकुमारी, ऊधमसिंह नगर।
  • कमलजीत कौर, पलिया, लखीमपुर खीरी।
  • उमा गंगवार, ऊधमसिंह नगर।
  • पीयूष टंडन, ऊधमसिंह नगर।
  • रामेश्वर दयाल, सिद्धार्थनगर, बरेली।
  • राजन प्रसाद, ऊधमसिंह नगर।
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