जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में सोमवार को एक दलाल घुस गया। उसने एक गंभीर बच्चे के तीमारदार को बातों में फंसाकर निजी अस्पताल ले जाने को तैयार कर लिया। दलाल ने खुद को तीमारदार बताते हुए वार्ड में मौजूद स्टाफ पर दबाव बनाया और डिस्चार्ज कराने की जिद की। स्टाफ ने डिस्चार्ज नहीं किया तो उसने बच्चे को बिना डॉक्टरों के बताए ले जाने की तैयारी कर ली, लेकिन जब पता चला कि बच्चे के माता-पिता गरीब है तो बिना कुछ बताए चुपके से निकल गया। जब स्टाफ को पता चला कि डिस्चार्ज का दबाव बनाने वाला बच्चे का तीमारदार नहीं है तो हड़कंप मच गया।
जिला अस्पताल परिसर में मरीजों को बाहर ले जाने वाले दलाल खुलेआम घूमते रहते हैं। महिला अस्पताल और संयुक्त अस्पताल से आए दिन मरीजाें को झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाया जाता है। सोमवार को भी ऐसी ही कोशिश हुई। बच्चा वार्ड में 21 नंबर बेड पर भर्ती 10 साल के बच्चे को दो दिन से तेज बुखार है। उसके तीमारदाराें ने बताया कि बुखार के बाद बच्चे को गांव के ही डॉक्टर से दवा दिलवाई थी, लेकिन बुखार नहीं उतरा। एक दलाल बच्चे के तीमारदार से मिला और उनको झांसा देकर बच्चे की छुट्टी करवाकर निजी अस्पताल ले जाने की जिद करने लगा। उसने अस्पताल को बिना बताए बच्चे को बेड से उठवा भी लिया, लेकिन जब पता चला कि बच्चे के माता-पिता गरीब हैं तो वह भाग गया। बच्चे को दोबारा भर्ती कराने के लिए तीमारदार प्रमुख अधीक्षक के पास पहुंचे, तब मामला खुला। हालांकि, बच्चे को भर्ती कर लिया गया है। बच्चा वार्ड की सिस्टर इंचार्ज डेजी लाल ने बताया कि खुद को तीमारदार बता रहा शख्स पहली बार दिखा था। उसे पहचान लिया गया है।