बरेली। बाकरगंज क्रॉसिंग पर सेतु निगम 900 मीटर लंबा पुल बनाएगा। नई कार्ययोजना में पुल का निर्माण किया जाना शामिल है। प्रस्ताव सेतु निगम मुख्यालय को भेजा गया है। निर्णय शासन स्तर से होना है।
किला से बाकरगंज की ओर आना-जाना है तो उत्तर रेलवे व पूर्वोत्तर रेलवे की क्राॅसिंग से होकर गुजरना पड़ेगा। दोनों क्राॅसिंग एक ही मार्ग पर हैं। अगर कोई एक क्रॉसिंग बंद है न तो बाकरगंज से किला जा सकते हैं न आ सकते हैं। कई बार तो जाम में स्कूली वाहन और एबुलेंस फंस जाती हैं। रेलवे क्रॉसिंग रास्ता रोकती हैं। इसलिए पुल बनाने की मांग होती रही है। हर रोज छोटे-बड़े दस हजार से अधिक वाहन क्राॅसिंग बंद होने पर फंस जाते हैं। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक बीके सेन ने पुल बनाए जाने के लिए अभियंताओं की टीम के साथ सर्वेक्षण किया। कार्ययोजना बनाकर मुख्यालय को भेजी है। सेतु निगम के महाप्रबंधक रविदत्त कुमार ने लखनऊ स्थित निगम के मुख्यालय पर पैरवी की है। मुख्यालय से मंजूरी मिल जाए तो फिर टेंडर निकलेंगे और काम होगा।
कोट-
बाकरगंज क्राॅसिंग पर पुल बनाने के लिए रेलवे की सहमति मांगी है। सहमति के बाद पुल बनाएंगे। मैंने मौके का निरीक्षण कर पुल की जरूरत को महसूस किया है। पुल बन जाता है तो 24 घंटे में दस हजार से अधिक वाहनों को फायदा मिलेगा। - बीके सेन, परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
बार-बार क्रॉसिंग बंद होने पर लगता है जाम
किला स्थित एनईआर रेलवे की क्रॉसिंग संख्या 248 को रविवार दोपहर 12.08 पर ट्रेन संख्या 05330 आई। तीन मिनट बाद क्राॅसिंग खुली पर इंजन की शंटिंग के लिए फिर से क्राॅसिंग बंद हो गई और बीस मिनट तक वाहन फंसे रहे। इस क्राॅसिंग से 24 घंटे में 41 ट्रेनें गुजरती हैं। सात घंटे क्राॅसिंग बंद रहती है। बाकरगंज क्राॅसिंग पर ही नार्दन रेलवे की क्रॉसिंग संख्या 359 बी है। 160 ट्रेनें 24 घंटे में गुजरती हैं। इसके चलते क्रॉसिंग 24 घंटे में 13 घंटे से अधिक बंद रहती है। अगर किसी व्यक्ति को किला की ओर से बाकरगंज जाना है तो 24 घंटे में 15-16 घंटे जाम में फंसना पड़ता है।
लोगों की बात:
सिर्फ प्रस्ताव तक न रहें सीमित....पुल बनवाएं अफसर
कोट-
पुल न बनने की वजह से कई लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए और जान गंवानी पड़ी। कई बार मांग उठाई पर सुनवाई नहीं हुई। - बबलू, बाकरगंज
कोट
मैं तो यही कहूंगा की सिर्फ प्रस्ताव और एस्टीमट न बने। मंजूरी के साथ काम भी शुरू हो जाना चाहिए। - राहुल कुमार सुभाषगर
कोट-
दिल्ली की तर्ज पर काम हो तभी जनता को फायदा मिल सकेगा। मंजूरी के बाद वर्षों इंतजार न करना पड़े। - दिलीप कुमार अग्रवाल, आलमगिरीगंज
कोट-
मरीज अस्पताल समय पर नहीं पहुंच पाते। बच्चे को स्कूल के लिए देरी हो जाती है। नौकरीपेशा भी परेशान होते हैं। - मोहम्मद आरिफ, बुधौलिया