कुछ धार्मिक किताबों में लिखी गई बातों की वजह से एक दूसरे के साथ उठने बैठने तक से परहेज करने वाले बरेलवी और देवबंदियों में सुलह की कोशिशें जारी हैं। मौलाना तौकीर से नाराज चल रहे बरेलवियों की ओर इत्तेहाद के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं हालांकि इनको मानना इतना आसान भी नहीं है।
दरगाह आला हजरत के मदरसा मंजरे इस्लाम के मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने एक बयान जारी कर इत्तेहाद के लिए चार शर्तें रखी हैं। पहली यह कि अल्लाह और रसूल की शान में देवबंदी आलिमों ने गुस्ताखाना बातें लिखीं हैं देवबंदी उनकी तकफीर करें। तहजीरुन्नास, हिफ्जुल ईमान, बराहीने कातेआ और तकबियतुल ईमान जैसी किताबों के छापने पर पाबंदी लगाएं। आला हजरत और मक्का शरीफ व मदीना शरीफ के आलिमों और मुफ्तियों के 1906 में दिए हुए फतवों के मजमुए हुसामुल हरमैन नामी आला हजरत की किताब की हर्फ ब हर्फ तस्दीक करें। इसके अलावा आतंक का पोषण करने वाली विचारधारा को अपने आप से अलग करने का एलान करें। यदि ये बातें ठीक कर ली जाएं तो इत्तेहाद हो जाएगा। नबीरे आला हजरत मौलाना मन्नान रजा खां (मन्नानी मियां) ने कहा है कि हम खुद और यहां के जिम्मेदारान भी देवबंद जा सकते हैं, मगर शर्त ये है कि देवबंद ने कुरान की कुछ आयतों का जो गलत अनुवाद किया है और किताबों में रसूल की शान के खिलाफ जो कुछ लिखा है उसे छापना छोड़ कर तौबा करें।
उन्होंने कहा है कि सुन्नियों को मुशरिक (मजार पूजने वाला) मानने वालों ने आखिर मौलाना तौकीर को कैसे अपने यहां आने दिया। वैसे तो तौकीर मियां को खुद वहां नहीं जाना चाहिए। पूरा खानदान नाराज हुआ है। इसके अलावा उन्होंने आईएमसी पर भी हमला किया। कहा कि आईएमसी बीजेपी और आरएसएस में पली फली है। जो यह चाहते हैं कि मुस्लिमों को बांट कर सत्ता में आ सकें।