मौलाना तौकीर रजा खां से पहले आईएमसी प्रवक्ता डा. नफीस खां ने भी कुछ विरोधियों की पोल खोली। उन्होंने बताया देवबंद जाने की मुखालफत करने वाले ऐसे भी हैं जो मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी हैदराबाद के वीसी सुरेशवाला की कयादत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने गए। वह आला हजरत के शहजादों में ही हैं। सब जानते हैं कि सुरेशवाला वहाबी हैं।
इसके अलावा मुंबई में सपा के अध्यक्ष अबू आजमी भी वहाबी हैं। उनके पास लोग एमएलसी की सिफारिश के लिए गए। वही बार-बार मसलक पर कायम रहने की बात करते हैं। बसपा महासचिव नसीमउद्दीन सिद्दीकी भी वहाबी हैं। उन्हें भी यहां रमजान में बुलाया गया। उनके साथ रोजा इफ्तार किया गया। जो लोग यह कहते हैं कि 15 साल से नहीं मिले वह एक महीना पहले ही मौलाना तौकीर से मिलने आए। राजनैतिक लाभ के लिए मौलाना तौकीर से प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां से मिलवाने की बात कही। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी मिसालें भी पेश की जब खानदान के दूसरे बुजुर्ग भी मिल्ली मसायल पर मिले, बैठक की और मदद भी की।
सभी आरोपी आतंकी नहीं होते
बरेली। आईएमसी मुखिया मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ हैं। इस्लाम भी इसकी मुखालफत करता है। शाकिर अंसारी की पैरवी में इसलिए देवबंद गया कि पहले भी कई मामले ऐसे हुए जिसमें मुस्लिमों को आरोपित किया गया और बाद में वह बरी भी हुए। इसी तरह वह भी लगता है। शाकिर के साथ भी 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें दस लोगों को छोड़ा भी जा चुका है।
उन्होंने कहा कि मिल्लत का कोई बच्चा न आतंकवादी है न हो सकता है, जो है वह विदेशी आतंकवादी हैं इसकी मुखाफत जरूरी है। अगर सच की बुनियाद पर गिरफ्तार नहीं किया जाता तो देश में बदअमनी फैल जाएगी। मेरा एक ही बच्चा है अगर शक भी हो गया कि वह इस तरह की बातों में लिप्त हो रहा है तो खुद उसे पुलिस के हवाले कर दूंगा। यह शब्द नहीं यह मेरा ईमान है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी वेबसाइट जो आतंकवाद का प्रचार करती हैं। उसे बंद किया जाना चाहिए। हुकूमत ऐसा नहीं कर सकते तो ब्लाक कर दे।