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Bareilly News: लक्ष्य की साधना में श्रम और समर्पण जरूरी, मुक्केबाज स्वीटी ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

Tue, 14 Jan 2025 02:14 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

मुक्केबाज स्वीटी बूरा ने कहा कि पहले लोग खेल के क्षेत्र में लड़कियों का समर्थन नहीं करते थे, लेकिन आज ये परिदृश्य बदल चुका है। आज लड़कियां हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। 
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मुक्केबाज स्वीटी बूरा, कोच अमनप्रीत कौर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज स्वीटी बूरा ने कहा कि जहां चाह है, वहां राह है। अगर मनुष्य के मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो कामयाबी कदम चूमती है। स्वीटी बरेली में आयोजित राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने आई थीं। उन्होंने कहा कि बॉक्सिंग पुरुषों का ही खेल माना गया है, पर यह मिथक अब टूट चुका है। अब महिलाएं हर खेल में परचम लहरा रही हैं।

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स्वीटी ने कहा कि पहले देश में खेल सुविधाओं का अभाव था, पर अब हर जिले में पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षक हैं। सरकार भी खेल और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। वर्तमान समय में हमारी महिला बॉक्सिंग टीम ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के खिताब पर कब्जा जमाया है। यह इस बात का प्रमाण है कि बेटियां किसी मामले में बेटों से कम नहीं। 

उन्होंने कहा कि पहले लोग खेल के क्षेत्र में लड़कियों का समर्थन नहीं करते थे, लेकिन आज ये परिदृश्य बदल चुका है। हालांकि, हर क्षेत्र की तरह खेलों में भी प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। चयनकर्ताओं के लिए भी चुनौती है कि टीम में किसका चयन करें? अगर इंसान के अंदर जज्बा है तो वह कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। 

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'सपने आपने देखे हैं तो पूरे भी आपको ही करने होंगे'
अंतरिक्ष में जाने की बात हो या देश चलाने की, महिलाएं हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहीं हैं। मैरीकॉम और लवलीना जैसी खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी में देश को ओलंपिक में पदक भी दिलाए हैं। कामयाबी पाने के लिए जरूरी है कि पूरी ईमानदारी से प्रयास करें। जो सपने आपने देख रखे हैं, उसे आपको ही पूरा करना होगा।  राष्ट्रीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता के लिए शहर आईं भारतीय यूथ महिला बॉक्सिंग टीम की कोच अमनप्रीत कौर ने ये बातें कहीं। 

उन्होंने बताया कि महिला खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समाज की सोच और तानों की होती है। हालांकि, अब इसमें बदलाव आ रहा है।महिलाओं को अब परिवार से सहयोग मिल रहा है। सरकार भी खेलों के प्रोत्साहन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। अगर महिलाएं अपने जीवन के उद्देश्य को प्राथमिकता दें तो बाधाएं उनके कदम नहीं रोक सकतीं। 
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