बरेली। विद्युत निगम के संविदाकर्मी ने एक युवक को घर से बुलाकर खंभे पर चढ़ा दिया। इस दौरान करंट लगने से उसके दोनों हाथ कट गए। अब अफसर मदद मुहैया कराने की जगह दिव्यांगता प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। हादसे के 25 दिन बाद पीड़ित परिवार को चीफ इंजीनियर की तरफ से मात्र 25 हजार रुपये की मदद दी गई। युवक ही घर का इकलौता सहारा है। अब दोनों हाथ न होने से वह भी असहाय हो चुका है, लेकिन निगम के अफसरों को यह दिख नहीं रहा।
क्योलड़िया इखलासपुर निवासी विपिन (27) के परिवार में पत्नी शीतल और दो बच्चे धैर्य (4) और पियूषी (1) हैं। कुछ समय पहले तक विपिन विद्युत निगम ने संविदा पर लाइनमैन था। काम छोड़ने के बाद वह मजदूरी करने लगा। शीतल के मुताबिक, 16 मई को सुबह 11 बजे अलीगंज उपकेंद्र में संविदा पर तैनात लाइनमैन सुनील कुमार घर आया और कहा कि विपिन को जेई नीरज कुमार ने बुलाया है।
विपिन को घर से ले जाकर सुनील ने खंभे पर चढ़ा दिया। काम के दौरान आपूर्ति चालू हो गई और करंट लगने से विपिन नीचे आ गिरा। इलाज के दौरान विपिन के दोनों हाथ काटने पड़े। डीएम के आदेश पर उपचार तो निशुल्क हुआ, लेकिन विद्युत निगम से कोई मदद नहीं मिली। शीतल 25 दिन तक अफसरों के चक्कर लगाने के बाद बृहस्पतिवार को पति विपिन को व्हीलचेयर पर लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची।
शीतल ने डीएम अविनाश सिंह को पूरा वाक्या बताया। डीएम ने चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश को कॉल करके मामले की जानकारी ली और कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद कलक्ट्रेट पहुंचे चीफ इंजीनियर ने शीतल के खाते में 25 हजार रुपये ट्रांसफर किए। कहा कि बाकी मदद दिव्यांग प्रमाणपत्र देने के बाद की जाएगी। इस पर शीतल ने आपत्ति जताई। कहा कि जब विपिन के दोनों हाथ कट चुके हैं और वह 100 फीसदी दिव्यांग है तो क्या प्रमाणपत्र देखकर मदद दी जाएगी? पीड़ित परिवार ने संविदा पर नौकरी की मांग भी उठाई, लेकिन निगम के अफसरों ने प्रमाणपत्र न होने का हवाला देकर टरका दिया।
कलक्ट्रेट के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से जुटाए जाने वाले कोष से जिलाधिकारी ने शीतल को एक लाख रुपये का चेक सौंपा। कहा कि विद्युत निगम के अफसरों को संविदा पर नौकरी के लिए आदेश दिए गए हैं। आर्थिक सहायता भी दिलाई जाएगी।
विपिन संविदा कर्मी नहीं था, फिर भी वह मदद दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। आज ही 25 हजार की आर्थिक सहायता की गई है। संविदा पर नौकरी और अन्य मदद के लिए दिव्यांग प्रमाणपत्र जरूरी है। इसलिए मांग की जा रही है। - ज्ञान प्रकाश, चीफ इंजीनियर