बीडीए अफसरों ने ब्याज अर्जित करने के लिए रोकी थी दूसरी किस्त
बरेली। रामगंगानगर आवासीय परियोजना के 55 करोड़ के मुआवजे को लेकर बीडीए और प्रशासन के बीच चल रही रार खत्म हो गई है। बीडीए ने शुक्रवार को 28 करोड़ की दूसरी किस्त भी विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को जारी कर दी है। एसएलएओ ने पहले आधी रकम मिलने पर मुआवजा बांटने से यह कहकर हाथ खड़े कर दिए थे कि आधी रकम से किस भूस्वामी को मुआवजा दें और किसे नहीं, जबकि बीडीए अफसर चाहते थे कि प्रथम किस्त की रकम बंट जाए। तब तक दूसरी किस्त बैंक में जमा रहने पर प्राधिकरण को ब्याज के कई लाख रुपये मिल जाएंगे।
बीडीए ने इस आवासीय परियोजना के लिए अहिरोला, चंदपुर बिचपुरी, डोहरिया और मोहनपुर उर्फ रामनगर में 173.67 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके लिए भूस्वामियों को 298 करोड़ का मुआवजा देना था। लगभग 55 करोड़ का अवशेष मुआवजा कई साल से लंबित था। हाल में बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने इस मुआवजे की पहली किस्त 27 करोड़ प्रशासन को जारी कर दी थी लेकिन एसएलएओ मदन कुमार ने इसे बांटने से यह कहकर मना कर दिया कि आधी रकम मिलने से यह दिक्कत आ रही है कि पहले किस काश्तकार को मुआवजा दें और किसे नहीं। एसएलएओ ने इसके लिए बीडीए से ही भू स्वामियों की लिस्ट भी मांगी थी।
उधर, मुआवजा न मिलने से किसान कलक्ट्रेट के चक्कर काटने लगे थे। इस समस्या को देखते हुए बीडीए ने शुक्रवार को मुआवजा की बाकी रकम करीब 28 करोड़ की धनराशि भी जारी कर दी है। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि 27 करोड़ की दूसरी किस्त इसलिए रोकी गई थी, क्योंकि पहली किस्त की धनराशि जब तक बंटती, तब तक बैंक में जमा दूसरी किस्त की रकम से अर्जित होने वाले ब्याज से बीडीए को कई लाख का फायदा हो जाता है। बीडीए अफसरों का कहना है कि इस परियोजना के लिए अब किसी काश्तकार का मुआवजा बकाया नहीं है।
रामगंगानगर आवासीय परियोजना के लिए मुआवजे का पूरा बजट एसएलएओ को दे दिया गया हैै। भूस्वामियों को कैसे मुआवजा आवंटित होगा, यह प्लानिंग प्रशासन को अपने स्तर से करनी है। - दिव्या मित्तल, उपाध्यक्ष, बीडीए