बरेली। ब्लिंकिट के स्टोर पर बुधवार को छापा मारकर औषधि प्रशासन की टीम ने दवाओं की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कार्रवाई से पहले विभाग की ओर से कुछ दवाएं ऑनलाइन मंगाई गईं तो बिल पर न तो डॉक्टर की पंजीकरण संख्या दर्ज थी, न ही लाइसेंस का उल्लेख किया गया था। बिल पर दर्ज फर्म का पता भी गलत निकला।
सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार ने बताया कि मंगलवार को उन्होंने ब्लिंकिट से ऑनलाइन दवाएं मंगाई थीं। बिल पर लाइसेंस के फॉर्म-21 का उल्लेख नहीं मिला। फर्म का पता गलत अंकित होने व डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज न होने जैसी कमियां मिलीं। इसके बाद टीम ने बुधवार को नेकपुर स्थित मूनस्टोन वेंचर एलएलपी पर छापा मारा तो पांच औषधियों के स्टाॅक में भिन्नता मिली। बिल व रिकाॅर्ड में गंभीर अनियमितताएं पाई गई।
टीम ने दवाओं के स्टाॅक, लाइसेंस व खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की। भंडारित एलोपैथिक औषधियों की गुणवत्ता भी परखी। इस दौरान शेड्यूल एच-वन रजिस्टर अपडेट नहीं मिला। एक्सपायर दवाओं को अलग रखने की समुचित व्यवस्था भी नहीं मिली। कंप्यूटर सिस्टम में बैच नंबर के आधार पर दवाओं की एंट्री न होने व फ्रिज के उचित उपयोग में भी कमी पाई गई।
सहायक आयुक्त 'औषधि' संदीप कुमार ने बताया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धाराओं के तहत दवाओं के क्रय-विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अन्य आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।