माधोबाड़ी के निजी गोदाम से बरामद चावल सरकारी गोदाम प्रभारी के सुपुर्द
जांच रिपोर्ट में कोटेदारों के साथ कई और के शामिल होने की जताई आशंका
बरेली। सरकारी चावल की हेराफेरी के मामले में आपूर्ति विभाग और पुलिस की ओर से संयुक्त रिपोर्ट दिए जाने के बाद जिला प्रशासन ने देर रात माधोबाड़ी के निजी गोदाम और गाड़ी में चावल लेकर वहां पहुंचने वाले उसके मालिक के खिलाफ धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज करवा दी। मामले की जांच कर रहे खाद्य विभाग के रडार पर वे 37 कोटेदार हैं जिन्होंने रविवार को एसएफसी के गोदाम से राशन उठाया था। इस बीच निजी गोदाम से बरामद चावल गल्ला मंडी स्थित सरकारी गोदाम के प्रभारी के सुपुर्द कर दिया गया है।
दरअसल सोमवार देर शाम आपूर्ति विभाग और पुलिस की ओर से जिला प्रशासन को दी गई संयुक्त जांच रिपोर्ट में आशंका जताई है कि सरकारी गोदाम से चावल नीरज गुप्ता के निजी गोदाम में पहुंचाने के मामले में कोटेदारों की भूमिका हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक छानबीन में पता चला कि रविवार को उत्तरी क्षेत्र के 18, पश्चिमी क्षेत्र के 15 और पूर्वी क्षेत्र के चार दुकानदारों ने राशन उठाया था। इन सभी 37 कोटेदारों की दुकानों का स्टाक चेक करने की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट पर एसआई जगदीश सिंह, नसीम खां, कांस्टेबल रोहताश, अंकित, राहुल गोस्वामी, आपूर्ति लिपिक सौरभ कुमार, निरीक्षक रश्मि सिंह, एआरओ रुचि मिश्रा, अमित कुमार सिंह, आरोपी चालक हरीओम आदि के हस्ताक्षर हैं।
देर रात जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद थाना बारादरी में निजी गोदाम के मालिक नीरज गुप्ता और गाड़ी मालिक हरिओम के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। एफआईआर में इस मामले में कोटेदारों के साथ कई और लोगों के भी शामिल होने की आशंका जताई गई है।
फिर सवाल.. असल खिलाड़ी इस बार पकड़े जाएंगे या नहीं
बरेली। सरकारी चावल माधोबाड़ी के निजी गोदाम में अनलोड होते हुए पकड़े जाने के बाद खाद्य विभाग से लेकर राशन की कालाबाजारी के नेटवर्क से जुड़े माफिया तक हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि घटना के 24 घंटे बाद भी अब तक गाड़ी और गोदाम मालिक के अलावा खाद्य विभाग इस खेल में शामिल कोई और नाम उजागर नहीं कर पाया है। इससे एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि कहीं हाफिजगंज की तरह इस मामले में भी सिर्फ गाड़ी ड्राइवर को फंसाकर असल खिलाड़ियों को साफ बचा तो नहीं दिया जाएगा।
माधोबाड़ी के निजी गोदाम में सरकारी चावल पकड़े जाने के बाद एक बार फिर साबित हो गया कि किस तरह लगातार गरीबों के हिस्से का राशन माफिया के गोदामों में पहुंच रहा है। सबसे अहम बात यह है कि लगातार जिले में ऐसे मामले पकड़े जा रहे हैं, फिर भी सरकारी तंत्र, खादी और खाकी तक माफिया की इतनी मजबूत है कि वह हर बार साफ बचकर निकल जाता है। पिछले साल हाफिजगंज में तत्कालीन एसपी देहात के खुद सरकारी राशन से भरा मिनी ट्रक पकड़कर थाने में खड़ा कराए जाने के बाद मामला सिर्फ गाड़ी के ड्राइवर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर खत्म हो गया था।
इंस्पेक्टर बारादरी शितांशु शर्मा ने रविवार रात को माधोबाड़ी के निजी गोदाम पर छापा मारकर सरकारी चावल उतरते पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक गोदाम बन्नूवाल कॉलोनी में रहने वाले नीरज गुप्ता का था। छापे के बाद नीरज गुप्ता तो पुलिस के सामने नहीं आया लेकिन अब तक की जांच में सामने आया कि चावल कोटेदारों का था। यह चावल नीरज के गोदाम तक क्यों और कैसे पहुंचा, इसका जवाब खाद्य विभाग की टीम अब तक नहीं ढूंढ पाई है। इस बीच सोमवार को पुलिस नीरज गुप्ता के घर भी पहुंची लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा ने बताया कि चालक को मुचलके पर छोड़ दिया है। पुलिस अब रिपोर्ट दर्ज करने के लिए खाद्य विभाग की तरफ की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
माधोबाड़ी के गोदाम में मिले चावल के 452 बोरे
माधोबाड़ी के गोदाम में देर रात तक गिनती के बाद खाद्य विभाग की टीम को यहां चावल के 452 बोरे मिले। यह शक होने पर कि कुछ बोरों में चावल कम और कुछ में ज्यादा है, टीम ने कांटे पर बोरों का वजन कराया गया। इनमें 371 बोरे 60 किलो और 81 बोरे 50 किलो चावल से भरे मिले। दो बोरे खुले हुए थे, उनमें 43 किलो चावल था। इसके अलावा गोदाम में 155 सरकारी बोरे खाली बरामद हुए। 28 सफेद बोरे खाली मिले जिनमें सरकारी अनाज को भरकर दूसरी जगह भेजा जाता था।
विशेष सचिव से शिकायत
बरेली। लाकडाउन में कई बार सरकारी राशन की कालाबाजारी के मामले सामने आए। लेकिन सिस्टम ने रफादफा करता रहा है। माधोबाड़ी में पकड़े गए सरकारी राशन के मामले में आंवला सांसद धर्मेन्द्र कश्यप के मीडिया प्रभारी राहुल कश्यप ने खाद्य व रसद विभाग के विशेष सचिव ओपी वर्मा को अवगत कराया है।