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‘काला धन’ बन गया  दो हजार का नोट

Sat, 19 Nov 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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'Black money' has become Two thousand note - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सरकार की नई करेंसी ने जनता की परेशानी कम करने के बजाय और बढ़ा दी है। बैंक या एटीएम में घंटों लाइन में लगने के बाद जब किसी को दो हजार का नोट मिलता है या बदलता है तो वह बाजार में आसानी से चल नहीं पाता। मजबूरी में आदमी उस नोट को फिलहाल घर पर ही रखना बेहतर समझता है, जिससे चलते दो हजार का नोट ‘काला धन’ बनता जा रहा है।
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दूध, सब्जी, कपड़ा, किराना, मेडिकल दुकानों पर दो या चार सौ रुपये का सामान लेने के बदले दुकानदार बचे पैसे नहीं दे रहे, जिसका काम पांच, 10, 20, 50 या 100 रुपये का है, उसके लिए गरीब, मजदूर या महिलाओं को दो हजार का नोट लेकर पूरी मार्केट में घूमना पड़ता है। कड़ी मशक्कत के बाद वह अपना नोट बदलवा पाता है। सिविल लाइन,  शहामतगंज, पुराना रोडवेज, कुतुबखाना, डीडीपुरम, राजेंद्र नगर में किराना, होटल, रेस्टोरेंट, ठेले पर दो हजार का नोट नहीं बदल पा रहे। 

अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स पर राहत
जीवनधारा हॉस्पिटल के डॉ. सत्येंद्र सिंह का कहना है कि उनके पास रोजाना आने वाले दो सौ मरीजों में लगभग 60 मरीज दो हजार का नोट लेकर आते हैं। उनकी दवाई तीन या चार सौ की बनती है तो वह उनकी दिक्कतों को समझते हुए नया दो हजार का नोट लेकर चेंज दे देते हैं। किशोर मेडिकल स्टोर के दुर्गेश खटवानी का कहना है कि वह दो हजार का नोट लाने वाले ग्राहकों को दवा लेने के बाद बाकी बचे रुपये वापस कर रहे हैं। अगर कोई दो हजार के नोट चेंज न होने से परेशान है तो वह उसका बिना दवाई लिए भी सौ-सौ के नोट दे देते हैं।
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आखिर कहां खपाए जा रहे दो हजार के नोट
बरेली। बैंकों में दो हजार के नोट 11 नवंबर को ही आ गए थे। 16 नवंबर तक एटीएम में ये नोट फिट ही नहीं हो पाए। बैंक भी नोट बदलने वाले ग्राहकों को सौ, पचास, बीस या दस के नोट दे रहे थे। अगर ऐसा है तो बैंक बड़े नोट कहां खपा रहे हैं। चर्चा है कि बिल्डरों, उद्यमियों, व्यापारियों और नेताओं ने बैंकों से मिलीभगत कर बड़ी मात्रा में अपने काले धन के पुराने नोटों की गड्डियां नए नोटों में बदल ली हैं।   
अब तक खातों से रुपये निकालने और नोट बदलने के लिए बैंकों के अंदर और बाहर लगने वाली लाइनों में उद्यमी, नेता, बड़े आफीसर, व्यापारी या अन्य पूंजीपति नहीं दिख रहे। लाइनों में लगने वाली भीड़ मजदूर, गरीब और मध्यमवर्ग की है। पूंजीपतियों के पास पांच सौ या हजार के पुराने नोटों की भरमार पहले से ही थी। अमीरों के पास सौ, पचास, बीस या दस के नोट बहुत कम थे। कोई भी अमीर बैंकों में लाइन में भी नहीं लगा। फिर भी न केवल इनके पुराने नोट बदल गए, बल्कि दो हजार के नोट भी इनके पास पहुंच गए। 
सूत्रों के अनुसार बड़े उद्यमियों, इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट कालेज चलाने वाले संचालकों ने नौकरों और स्टूडेंट्स की फीस जमा करने के नाम करोड़ों की ब्लैक मनी को दो हजार में व्हाइट कर लिया है। अमीरों ने थोक में आईडी लेकर न केवल पुराने पांच सौ और एक हजार के नोट बदल लिए, बल्कि खातों से भी बैक डोर से रकम घर पहुंच गई। अब तक दो हजार की नई करेंसी कितनी आई। सुरक्षा के लिहाज से बैंकों ने इसको सार्वजनिक नहीं किया है। 

तीन दिन में अपडेट होंगे सभी एटीएम
एटीएम को नई करेंसी के दो हजार और पांच सौ के नोट निकालने के लिए अपडेट किया जा रहा है। तीन दिन में 220 एटीएम अपडेट हो चुके हैं। लीड बैंक मैनेजर ओपी बढ़ेरा ने बताया कि दो से तीन दिन में जनपद के 415 एटीएम अपडेट हो जाएंगे। पांच सौ का नया नोट भी एक-दो दिन में पहुंचने की उम्मीद है। बैंकों में भीड़ कम हो गई है। हफ्ते भर में स्थिति सामान्य हो जाएगी। 
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