पहले लोकसभा। फिर विधानसभा। दोनों में भाजपा 42 फीसदी मतदाताओं के समर्थन से प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने में कामयाब रही। अब पार्टी का पूरा फोकस निकट भविष्य में होने वाले निकाय और सहकारिता के चुनाव पर है।
नगर निगमों में पार्टी पहले से मजबूत है, लेकिन नगर पालिका और नगर पंचायतों के अलावा सहकारिता के क्षेत्र में सपा की जड़ें कमजोर करने के लिए पार्टी ने छोटे जिलों में एक और बड़े जिलों में दो विस्तारक मनोनीत करने की योजना बनाई है। ये विस्तारक भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी होंगे। प्रदेश में दो लाख कार्यकर्ताओं को दूसरे क्षेत्रों में भेजकर उन बूथ और सेक्टरों में नए मतदाताओं को जोड़ने को कहा गया है जिन पर विधानसभा चुनाव में पार्टी को कम वोट मिले। पार्टी का मिशन 80 फीसदी मतदाताओं पर काम करके 2019 के लोकसभा चुनाव में 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करना है। इसके लिए नारा दिया गया है- पूर्व योजना, पूर्ण योजना। इसमें 12 कार्यक्रम तय कर पदाधिकारियों को जिम्मेदारी बांटी गई है।
विधानसभा चुनाव में 42 फीसदी वोट लेकर प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई भाजपा सहकारिता और निकाय चुनाव के जरिए नए मतदाताओं को जोड़ना चाहती है ताकि दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में इसका फायदा मिले। सहकारिता में सपा की सबसे मजबूत पकड़ है। इसकी काट के लिए पार्टी ने युवा कार्यकर्ताओं को विस्तारक बनाकर दूसरे क्षेत्रों में 15 दिन के प्रवास के लिए भेजा है। औसतन तीन विधानसभाओं पर एक विस्तारक रखा गया है। ये विस्तारक उन सेक्टर और बूथ प्रभारियों के चार सदस्यीय पैनल के माध्यम से नए मतदाताओं को जोड़ेगा, जहां भाजपा हारी है। सहकारिता में 90 के दशक में दिग्विजय सिंह गंगवार नेशनल कोआपरेटिव सेक्टर के चेयरमैन बने थे। इसके बाद भाजपा कमजोर होती गई। भूमि विकास बैंक, सहकारी बैंक, इफको सेल, सहकारी गन्ना समितियों पर सपा की मजबूत पकड़ है। इसकी काट के लिए प्रदेश के 1 लाख 47 हजार 148 बूथों पर दीनदयाल गोष्ठी, वृक्षारोपड़, रक्तदान, सामाजिक समरसता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। पूरे अभियान की मानीटरिंग का दायित्व प्रदेश भाजपा महामंत्री सुनील बंसल और निकाय चुनाव प्रभारी जेपीएस राठौर को सौंपा गया है। ओबीसी मोर्चे के संयोजक पूरनलाल लोधी का कहना है कि सहकारिता और निकाय के माध्यम से दीनदयाल शताब्दी वर्ष पर 20 सितंबर तक अभियान चलाकर पार्टी दलित, पिछड़ों अति पिछड़ों, महिलाओं समेत हर वर्ग के मतदाताओं का समर्थन हासिल कर 2019 के लोकसभा चुनाव में जाना चाहती है।