भाजपा ने कहा- हमारे प्रत्याशी नहीं थे रामाशंकर भारद्वाज
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जिलाध्यक्ष बोले- प्रत्याशी न उतारना हाईकमान का फैसला
बरेली। चर्चाएं जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से ही शुरू हो गई थीं और आखिर में हुआ भी वही। भुता में भाजपा की ओर से मैदान छोड़ दिए जाने के बाद ब्लॉक प्रमुख पद पर पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव के भाई व सपा उम्मीदवार जगमोहन सिंह निर्विरोध निर्वाचित हो गए। जगमोहन के खिलाफ यहां एकमात्र उम्मीदवार रामाशंकर भारद्वाज थे जिन्होंने शुक्रवार को अपना परचा वापस ले लिया। अब भाजपा उन्हें अपना प्रत्याशी मानने से भी इनकार कर रही है।
जिला पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा के सात सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग की थी जिसकी वजह से पार्टी प्रत्याशी को भाजपा से दुगने सदस्य होने के बावजूद करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई थी कि भाजपा ने ब्लॉक प्रमुख की भुता सीट के बदले सौदा किया है। अनाधिकारिक तौर पर सपा के कई नेता भी इसे स्वीकार कर रहे थे। सोशल मीडिया पर भी सपाइयों की तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। अब तक ये सब चर्चा में ही था लेकिन इन्हीं चर्चाओं के मुताबिक शुक्रवार को भुता में एकाएक घटनाक्रम पलट गया।
भुता सीट से सपा नेता व पूर्व विधायक महिपाल सिंह के भाई जगमोहन सिंह चुनाव लड़ रहे थे। बृहस्पतिवार देर रात तक भाजपा ने इस सीट पर कोई प्रत्याशी नहीं उतारा था। भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रामाशंकर भारद्वाज ने जरूर पर्चा दाखिल किया था लेकिन शुक्रवार को उन्होंने अपना परचा वापस ले लिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी में फिर चर्चाएं तेज हो गईं कि जिला पंचायत चुनाव के बदले भुता सीट पर भाजपा की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा गया है।
प्रदेश की संस्तुति पर सूची घोषित होती है। भुता में प्रत्याशी न बनाकर प्रतीक्षारत कर दिया गया था। वहां प्रत्याशी क्यों नहीं घोषित हुआ, हम इस पर कुछ नहीं कह सकते हैं। आवेदन हुए होंगे लेकिन पार्टी नेतृत्व ने शायद कुछ ऐसा सोचा हो कि वहां चुनाव मजबूती से लड़ पाएंगे या नहीं। जो भी कारण रहा हो, मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता। - पवन शर्मा, जिलाध्यक्ष भाजपा
मेरे भाई ने चुनाव लड़ा और मजबूती से लड़ा। हमारे पास बहुमत था, यह बात सभी को पता है। विपक्ष ने प्रत्याशी नहीं उतारा या किसी विपक्षी ने पर्चा क्यों वापस ले लिया, मुझे तो इस पर कुछ नहीं कहना है। -महिपाल सिंह यादव, पूर्व विधायक