इसके बाद उन्होंने मुस्लिम नेता व कार्यकर्ताओं से पूछा कि आप बताइए कि भाजपा को वोट देने के बाद आपको कोई दिक्कत हुई क्या, इस पर मुस्लिम समाज के लोगों ने एक आवाज में जवाब दिया कि नहीं। डिप्टी सीएम ने कहा कि हम तो शुरू से ही सबका साथ-सबका विकास पर काम कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। अल्पसंख्यकों के लिए मोदी-योगी सरकार की कुछ योजनाएं भी गिनवाईं।
मुसलमानों के एक तबके को साथ लाने की कोशिश
पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि निकाय चुनाव के बाद एक आंतरिक सर्वे हुआ। इसमें सामने आया कि मुसलमानों के प्रभाव वाली सीटों पर इस बिरादरी से एक तबके ने खुलकर भाजपा का साथ दिया। लोकसभा चुनाव में यदि बड़े अंतर से जीत हासिल करनी है तो इस तबके को साथ लेकर चलना होगा।
इसी के तहत पार्टी ने भाषण के तरीके में बदलाव किया है। 14 लोकसभा सीटों पर पार्टी कड़े मुकाबले में फंस सकती है और इन सीटों पर मुस्लिम वोट करीब 30 फीसदी है। अब पार्टी की रणनीति यह है कि इसमें एक तबके का 15 फीसदी तक वोट ले लिया जाए तो यहां बिना किसी परेशानी के जीत हासिल कर लेगी।
सर्वे : मुसलमानों का बढ़ा भरोसा
मुसलमानों में केंद्र सरकार के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं है तो उनके सम्मेलन व नेताओं के भाषण में केंद्र सरकार की योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र ही किया जाएगा। सर्वे के आधार पर पार्टी का मानना है कि मुसलमानों में भाजपा के प्रति भरोसा बढ़ा है। इसी के तहत सूफी विचारधारा को मानने वाले कव्वालों से कार्यक्रम कराए जाएंगे। इसका पूरा कार्यक्रम भी तय हो चुका है।