एंटीबॉडी के भरोसे खुद को सुरक्षित मानना खतरनाक, हो सकते हैं गंभीर हालात
चिकित्सकों के मुताबिक भ्रम में न रहें लोग, वायरस के म्यूटेशन से हो रहे संक्रमित
बरेली। जिले में 80 फीसदी से ज्यादा रिकवरी रेट बेशक दर्ज हो रही है, लेकिन स्वस्थ हो चुके लोगों के भी दोबारा संक्रमित होने की आशंका बनी हुई है। संक्रमण की पहली लहर में संक्रमित रहे लोग दूसरी लहर में भी संक्रमित होने की रिपोर्ट से अफसर चिंतित हैं। उनके मुताबिक, हल्के संक्रमण के चलते वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी कम रही। लिहाजा, कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोग विशेष सावधानियां बरतें अन्यथा अब संक्रमण जानलेवा हो सकता है।
माइक्रो बॉयोलॉस्टि डॉ. राहुल गोयल बताते हैं कि कोरोना से लड़ने के लिए शरीर एंटीबॉडी बनाता है लेकिन ठीक होने वाले एक तिहाई लोगों में पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं बन रही है। ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा दोबारा है। उन्होंने बताया कि संक्रमण के बाद एंटीबॉडी का पता करने के लिए कई देशों में शोध चल रहे हैं। हालांकि अभी तक यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि एक बार संक्रमित होने पर दोबारा संक्रमण की गुंजाइश नहीं है। इसलिए जरूरी है कि सावधानी बरती जाए। इनमें ह्रदय, किडनी और सांस के मरीजों को विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। क्योंकि दूसरी लहर में चपेट में आने पर पूर्व में संक्रमित होने से कम हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता नए वायरस से लड़ने में नाकाम साबित हो सकती है।
गलतफहमी में न रहें, प्रोटोकॉल का पालन करें
इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक, पूर्व में संक्रमित रहे लोग दूसरी लहर में भी संक्रमित मिल रहे हैं। इसमें जिला अस्पताल लैब के वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन समेत कई कारोबारी और स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं। आशंका जताई है कि अबकी बार जो वायरस हावी हुआ है वह पिछले स्ट्रेन से पांच गुना घातक है। लिहाजा, हल्की रोग प्रतिरोधक क्षमता या कम एंटीबॉडी होने पर बचाव के नियमों को अनदेखा करने वालों को तेजी से चपेट में ले रहा है। उन्होंने बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ख्याल रखने की अपील लोगों से की है।
लक्षण बताते हैं कम या अधिक एंटीबॉडी
डॉ. गोयल के मुताबिक पूर्व में दिल्ली में हुए तीसरे सीरो सर्विलांस में करीब 34 फीसदी लोग जो पूर्व में संक्रमित हुए थे, उनमें एंटीबॉडी नहीं मिली थी। यह सभी बगैर लक्षण वाले संक्रमित थे। वहीं, जिनमें लक्षण मिले थे उनमें भी 36 दिन बाद एंटीबॉडी के तेजी से गिरने का पता चला था। जो बताता है कि अधिकतम तीन से पांच माह में ही एंटीबॉडी का असर खत्म हो सकता है। लिहाजा, पूर्व में संक्रमित मिले गंभीर लक्षण वाले भी पांच माह बाद संक्रमित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी के खिलाफ बनने वाली एंटीबॉडी एक निर्धारित समय तक ही प्रभावी रहती है फिर नष्ट होती है।
गैरजरूरी एंटीबॉडी शरीर से हो जाती है खत्म
कोविड चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. वागीश वैश के मुताबिक, एंटीबॉडी और इम्युनिटी अलग-अलग हैं। इम्युुनिटी शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता है और एंटीबॉडी शरीर का वह तत्व है जिसका निर्माण इम्यून सिस्टम में वायरस को खत्म करने के लिए होता है। जब शरीर को इसकी जरूरत नहीं होती तो यह स्वत: खत्म हो जाती है। यही वजह है कि जो पूर्व में संक्रमित रहे थे वह दूसरी बाद भी पॉजिटिव आ रहे हैं। जिससे बचने के लिए वैक्सीनेशन कराने, कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है।
‘दोबारा कितने लोग संक्रमित मिले हैं इसकी अभी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई लेकिन दोबारा संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। इसलिए पूर्व में संक्रमित रहे लोग खुद को सुरक्षित न मानें। संक्रमण से बचने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करें और संदेह होने पर तत्काल जांच कराएं।’
- डॉ. सुुधीर गर्ग, सीएमओ