राज्यपाल राम नाईक ने भारत माता की जय न बोलने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनको भारत माता की जय नहीं बोलनी है वो बेशक न बोलें लेकिन अपना मुंह तो बंद ही रखें। भारत माता की जय न बोलने वाले क्या राष्ट्रभक्त नहीं हैं, ये सवाल उठाने वालों को नसीहत देते हुए राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रभक्ति की भावना सबसे ऊपर है। इसी भावना से भारत माता की जय और वंदे मातरम् बोलते हुए सरदार भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने अपनी जान दे दी। उनकी कुर्बानी को याद रखने के लिए ही हम भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलते हैं। उन्होंने कहा कि जो नहीं बोलते उनकी संख्या एक फीसदी भी नहीं है और इतनी कम संख्या के जय बोलने न बोलने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
श्री शिरडी सांई सेवा ट्रस्ट की ओर से यहां शहर के गांधी उद्यान में रविवार को आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने आए राज्यपाल दोपहर पत्रकारों से रूबरू थे। इससे पहले समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह की परंपरा शुरू हो गई है। इस साल 22 विश्वविद्यालयों में से 21 में दीक्षांत समारोह कराए गए हैं।
आजम के सवाल पर कहा- नो कमेंट
मीडिया के लोगों ने राज्यपाल के सामने प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां के बयानों का जिक्र किया तो राज्यपाल ने कहा कि आजम खां सदन के बाहर जो भी राजनीतिक बयानबाजी करते हैं, संवैधानिक पद पर होने के कारण उन बयानों पर मैंने कोई टिप्पणी न तो पहले की है और न अब करूंगा। विधानसभा के अंदर उन्होंने जो असंसदीय बातें कहीं मैंने उस पर आपत्ति जताई। इसीलिए 60 लाइनों में से 20 लाइनें खुद विधान सभा अध्यक्ष ने काट दीं। मैंने इसी पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था, विधानसभा अध्यक्ष भी मिलने आए। उन्हें बता दिया है कि बिल क्यों पास नहीं हुए हैं। मुख्यमंत्री से भी इस बारे में मुलाकात होनी बाकी है।