नगर पंचायत उसहैत की 75 बेटियां समाज के लिए मिसाल कायम कर रही हैं। सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, रोड लाइट जैसी समस्याओं पर इनकी नजर रहती है। कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता तो ये बेटियां उसे प्रोत्साहित करती हैं, मुफ्त ट्यूशन पढ़ातीं हैं। नगर पंचायत प्रशासन ने इनके घरों के दरवाजों को गुलाबी रंग से रंगवाकर इनके नाम की पट्टिका लगवाई है।
‘मेरा प्रयास मेरी पहचान’ समूह के नाम से काम करने वाली बेटियां पढ़ाई के साथ-साथ अपने घरों की भी जिम्मेदारियां निभाती हैं। ग्यारह वार्डों में रहने वाली इन 75 छात्राओं के दो बैच हैं, जो निरंतर स्वच्छता व अन्य बिंदुओं पर काम कर रहे हैं। नगर पंचायत उसहैत की चेयरपर्सन का कहना है कि नगर पंचायत की स्वच्छता रैंकिंग में हर साल सुधार हो रहा है। इसमें इन बेटियों का योगदान महत्वपूर्ण है।
इतना ही नहीं, बेटियों की जागरूकता मुहिम लोगों पर असर डाल रही है। कस्बे में कई ऐसे परिवार भी हैं, जहां बेटियां नहीं हैं। ऐसे परिवार बेटियों के स्थान पर अपने दरवाजे पर बहू के नाम की पट्टिका लगवा रहे हैं।
लक्ष्य पूरा करने में मिल रही मदद
चेयरपर्सन सैनरा वैश्य बताती हैं कि चार साल पहले उन्होंने नगर से पॉलिथीन खत्म करने को मुहिम शुरू की थी। केवल नगर पंचायत स्टाफ के सहारे लक्ष्य हासिल न हुआ तो इस मुहिम में बेटियां को शामिल किया। इनकी मदद से अभियान शुरू किया गया कि सप्ताह भर में घरों में जमा की गई पॉलिथीन नगर पंचायत को दी जाए और उसके बदले घर की जरूरत के हिसाब से सैनेटरी पैड दिए जाएंगे। इससे नगर की स्थिति काफी हद तक सुधरी है। नगर को स्वच्छ रखने के साथ ही बेटियों व महिलाओं को बेवजह की बीमारियों से छुटकारा दिलाने का लक्ष्य पूरा हो रहा है।
बेटियां बोलीं-कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
अलका कश्यप दसवीं की छात्रा हैं। परिवार के साथ पशुपालन भी करती हैं। अलका अपनी पूरी गली की स्वच्छता के साथ ही पॉलिथीन जमा कर सैनेटरी पैड देने के अभियान को गति दे रही हैं। कहती हैं कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती। मुहिम से जुड़कर गर्व महसूस होता है।
तुलसी ग्यारहवीं में पढ़तीं हैं। बैडमिंटन व चक्का फेंक में उन्होंने मेडल जीते हैं। कहती हैं कि मेरे प्रयास से नगर के लोगों का भला हो और नगर स्वच्छ रहे तो अच्छा लगता है। स्वच्छताग्राही के रूप में काम करने के दौरान काफी कुछ सीखने को भी मिल रहा है।
सौम्या स्वच्छता अभियान के साथ ही छोटे बच्चों को पढ़ाने में भी दिलचस्पी रखती हैं। वह कहती हैं कि नगर की बेटियों के अलग-अलग ग्रुप काम कर रहे हें। कुछ हटकर करना अच्छा अनुभव देता है। तमाम समस्याओं का आसानी से निपटारा हो जाता है।
दसवीं की छात्रा अनीता पशुपालन भी करती हैं। परिवार की कमाई का यह मुख्य जरिया है। वह कहती हैं जब मुहिम से जुड़े तो शुरू में लगता था कि रास्ता कठिन है, अब रास्ते खुद बन रहे हैं। नगर स्वच्छ हो रहा है। बच्चे स्कूल जा रहे हैं। लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो रहा है।