पंजाब के अमृतसर जिले के वेरका गांव निवासी कारपेंटर रंजीत सिंह पिछले चार साल से बेटी की खोज में दर-दर खाक छान रहे थे। बृहस्पतिवार सुबह यहां महिला थाने में बेटी मिली तो खुशी से उनकी आंखें छलक आईं। बेटी भी खुशी से खिल उठी। महिला थाने में कागजी खानापूरी के बाद रंजीत बेटी को लेकर पंजाब लौट गए।
रंजीत ने बताया कि उनके दो बेटे और इकलौती बेटी काजल है। करीब चार साल पहले गुस्से में काजल घर से निकल आई थी। फिर उसे बहुत तलाशा। रिपोर्ट लिखाने पर वेरका थाने की पुलिस भी तलाश में जुटी। मगर काजल का कुछ पता नहीं चला। गम में उसकी मां सतेंद्र कौर ने खाना-पीना छोड़ दिया और महीनों बीमार रही। हर वक्त उसकी नजरें दरवाजे की तरफ लगी रहती थीं। कहती जाने किस वक्त काजल आ जाए। मंगलवार को वेरका पुलिस ने काजल के बरेली में होने की जानकारी दी तो ऐसा लगा मानों खोई दौलत मिल गई।
छोटे भाई सुम्मेर सिंह के साथ रंजीत हावड़ा एक्सप्रेस से बुधवार रात करीब तीन बजे बरेली जंक्शन पहुंचे। स्टेशन पर जैसे-तैसे दो घंटे बिताए और बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे महिला थाने गए। वहां बेटी काजल को देखा तो खुशी का ठिकाना न रहा। बेटी को कलेजे से लगाया तो आंखों से आंसू टपकने लगे। रंजीत अपने साथ वेरका पुलिस का अथॉरिटी लेटर भी लाए थे, जो महिला थाने में जमा कर दिया। पुलिस ने कागजी खानापूरी करने के बाद शाम करीब छह बजे रंजीत और काजल को एसपी सिटी के सामने पेश किया। इसके बाद रंजीत बेटी को लेकर यहां से रवाना हो सके।
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घर जाकर करूंगा कार्रवाई
रंजीत ने बताया कि हम बेटी के गम में चार साल तड़पते रहे। उसे खोजने में हजारों रुपये खर्च हो गए। एनजीओ संचालिका चाहती तो काजल के मिलने की सूचना दे सकती थी। उसने अपने घर में काजल को नौकरानी बनाकर रखा। रंजीत के मुताबिक यहां पुलिस से संचालिका की सांठगांठ हो चुकी है। इसलिए घर जाने के बाद वेरका (अमृतसर) थाने में कार्रवाई करेंगे।
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एनजीओ संचालिका को थाने बुला लिया था। उससे काजल के पिता को कोई शिकायत नहीं है। उनका कहना है कि बेटी गलत हाथों में नहीं गई यही बहुत है। वह समझौता लेटर देने के बाद काजल को लेकर चले गए। - विजय सिरोही, एसओ, महिला थाना