बरेली। नवरात्र के प्रथम दिन से ही मां दुर्गा की आराधना शुरू हो जाती है, लेकिन बंगाली समाज षष्ठी से मां दुर्गा के पूजन के लिए सार्वजनिक समारोह आयोजित करता है। बंगाली समाज के लोग अपनी मिट्टी से दूर रहकर भी परंपरागत रूप से यह उत्सव मनाते हैं। भव्य पंडालों में पूजा व सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। शहर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का इतिहास तकरीबन सौ साल पुराना है। उस समय के प्रतिष्ठित बंगाली समाज के लोगों ने शहर में पंडाल लगाने की शुरुआत की थी।
बंगाली कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी के मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी ने बताया कि तकरीबन सौ साल पहले पश्चिम बंगाल से नौकरी, व्यवसाय, शिक्षा आदि के लिए बंगाली समाज के कुछ लोग शहर आए थे। उस समय बिहारीपुर के एक घर में पंडाल सजाया जाता था। समय बीतने के बाद अब पंडालों की संख्या बढ़ चुकी है। प्रमुख रूप से मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे, दुर्गाबाड़ी रामपुर गार्डन, रोड नंबर चार इज्जतनगर, दादू का मंदिर इज्जतनगर स्टेशन के सामने, कृष्णा नगर कालीबाड़ी, चौपुला मनोरंजन सदन, बीआई बाजार कैंट व कुदेशिया फाटक के पास पंडाल सजाए जाते हैं। महाषष्ठी पर पंडाल की रौनक देखते ही बनती है।
होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम
रामपुर बाग निवासी अमोल सरकार ने बताया कि दुर्गाबाड़ी में पंडाल लगाने की शुरुआत वर्ष 1960 में डॉ. एससी चटर्जी, डॉ. पीएम गुहा, पीसी गांगुली, एएम मुखर्जी, सुकुमार घोष, एके चटर्जी, बीआर ठाकुर, नीलरत्न दत्ता आदि ने की थी। यहां धूमधाम से महाषष्ठी पूजा के साथ पांच दिवसीय कार्यक्रम शुरू होता है। शुक्रवार को महाषष्ठी पूजा के बाद 21 अक्तूबर को महासप्तमी पूजा की जाती है। 22 को महाअष्टमी पूजा, 23 को महानवमी पूजा व 24 को दशमी पूजा के साथ दर्पण विसर्जन आदि कार्यक्रम होते हैं। नवमी तक प्रत्येक शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
वर्ष 1992 से सज रहा पंडाल
मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे में वर्ष 1992 से दुर्गा पूजा पंडाल सजाया जा रहा है। बंगाली कल्चरल व वेलफेयर सोसाइटी की ओर से लगाए जाने वाले इस पंडाल में महाषष्ठी से पांच दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पूजा कमेटी के अध्यक्ष सीए बिकास राय चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को देवी प्रसाद चटोपध्याय ने मंत्र उच्चारण के साथ महाषष्ठी पूजा सुबह सात बजे शुरू की। शाम को अधीवास पूजा प्रारंभ हुई। इसके बाद मां दुर्गा, मां सरस्वती, श्रीगणेश व कार्तिक की मूर्तियों को स्थापित किया गया। पश्चिम बंगाल से आए ढाकियों के ढोल-नगाड़ों से पूजा पंडाल गूंज उठा। आनंद मेले का आयोजन शाम को किया गया।