पैसा इंसानी संवेदना पर भारी पड़ गया है, इसकी एक दर्द भरी नजीर फिर दिखी। एक तरफ बरेली के वे डॉक्टर रहे जिन्हाेंने गुजरात की बुुजुर्ग महिला का इलाज रुपये न होने के कारण बीच में ही छोड़ दिया। उन्हें कहीं और ले जाने को कहा तो उनके बेटे काली प्रसाद जिला अस्पताल ले आए जहां उनकी मौत हो गई। अंत्येष्टि के लिए भी बेटे के पास पैसे नहीं थे लेकिन शहर के कुछ लोगों ने उनकी मदद की तब यहीं बेटे ने मां की अंत्येष्टि की।
गुजरात के राजकोट में रहने वाले काली प्रसाद मिश्र अपनी 78 वर्षीय मां फूलबती बेन को रामजन्म भूमि अयोध्या से दर्शन कराकर बस से दिल्ली जा रहे थे। रविवार को फरीदपुर पहुंचे ही थे कि फूलवती को हार्ट अटैक पड़ गया। काली प्रसाद को लोगों ने सीधे शहर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया। काली प्रसाद के पास 30 हजार रुपये थे। अस्पताल ने जमा कराया और एक दिन इलाज किया। खर्च ज्यादा होने की बात बताकर अस्पताल ने रूहेलखंड मेडिकल कालेज ले जाने की सलाह दी। लेकिन वहां भी इलाज का खर्च डेढ़ लाख रुपये बताया गया। हारकर काली प्रसाद जब पैसों का इंतजाम नहीं कर सके तो जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। काली प्रसाद ने बताया की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। गुजरात में भी उनकी संपत्ति विवाद में फंसने के चलते उनका परिवार बिखर गया। उनके पिता और बहन की मौत होने के बाद सिर्फ काली ही अपनी मां का सहारा थे। नम आंखों से बार-बार आंसू पोंछते हुए यही कहते रहे कि...अगर रुपये होते तो मां नहीं मरती।
मदद से हुई अंत्येष्टि
होम्यो मेडिकल स्टोर चलाने वाले वीबी आर्य की काली प्रसाद से मुलाकात हुई। काली ने उन्हें पूरी बात बताई। उन्होंने उनकी माता फूलवती बेन को सीधे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डेढ़ हजार रुपये की मदद की। उन्होंने अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा के पदाधिकारियों को भी मदद के लिए कहा। सबने मदद की। लेकिन सोमवार को उनकी मौत हो गई। समाज के गजेंद्र पांडेय, कौशल सारस्वत, मनोज शर्मा, त्रिवुभन शर्मा, दिव्य चतुर्वेदी, पीएल शर्मा व अन्य ने मिलकर उनकी अंत्येष्टि करवाने में मदद की। फूलवती बेन की अर्थी भी जिला अस्पताल से उठी।