शहर विधायक डा. अरुण कुमार की विधायक निधि में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के नाम पर लाखों का गोलमाल कर लिया गया। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश अभियंत्रण एवं श्रम सहकारी संघ लिमिटेड ने घटिया मानक के कैमरे लगवा दिए। ये कैमरे लगने के कुछ ही समय बाद ही बंद हो गए। विधायक निधि का दुरुपयोग होने से नाराज विधायक ने संस्था और उसके ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीडीओ को पत्र लिखा। सीडीओ की सख्ती पर डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराने के बजाय एएसओ और एई की जांच टीम बना दी और तीन दिन में मामले की आख्या मांगकर मामला निपटाने की कोशिश की है।
विधायक निधि योजना 2014-15 में शहर विधायक डा. अरुण कुमार ने कुतुबखाना समेत अन्य मार्केट में 40 सीसीटीवी कैमरे लगवाने की संस्तुति की थी। इसके लिए 20 लाख से ज्यादा रुपये प्रस्तावित थे। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) ने 609960 रुपये की राशि अवमुक्त भी कर दी। कार्यदायी संस्था ने ऐसे कैमरे लगवा दिए जो लगते ही बंद हो गए। दुकानदारों ने विधायक डा. अरुण कुमार को इसकी सूचना दी तो उन्होंनेे मुख्य विकास अधिकारी शिवसहाय अवस्थी को 17 अक्तूबर 2016 को पत्र लिखकर घपले की जांच कराने और कार्यदायी संस्था पर एफआईआर दर्ज करने को कहा। विधायक का पत्र मिलते ही सीडीओ ने डीआरडीए के परियोजना निदेशक साहित्य प्रकाश मिश्र से स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी। परियोजना निदेशक ने कार्यदायी संस्था पर एफआईआर दर्ज कराने के बजाय अर्थ संख्या अधिकारी आनंद कुमार और एई डीआरडीए मधुर मोहन अग्रवाल की दो सदस्यीय टीम बनाकर जांच रिपोर्ट मांग ली। अब संस्था और उसके ठेकेदार को बचाने की कोशिश हो रही है।
एई ही करते हैं कामों की जांच
विधायक निधि के कामों की गुणवत्ता की जांच डीआरडीए के एई ही करते हैं। जब एई एक बार सीसीटीवी कैमरों की गुणवत्ता जांच कर उस पर अपनी रिपोर्ट दे चुके हैं तो विधायक के पत्र पर वह दोबारा क्या जांच करेंगे और कार्यदाई संस्था और उसके ठेकेदार पर क्या कार्रवाई होगी। इसे आसानी से समझा जा सकता है।
विधायक निधि से लगे सीसीटीवी कैमरे बंद होने की शिकायत पर रिपोर्ट मांगी गई है। आख्या मिलने के बाद दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिवसहाय अवस्थी, सीडीओ