फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्मार्ट सिटी में हादसों के लिए भी रहें तैयार, नाले में बिछाई जा रही बिजली की केबल

सार

मानकों की उड़ाईं धज्जियां, 163 करोड़ के आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट में कैमरों को करंट की सप्लाई देने के बिछानी थी अंडरग्राउंड केबल
 
विज्ञापन
नालों से होकर गुजारी जा रही बिजली केबल।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली। स्मार्ट सिटी में लोगों को हादसों के लिए भी तैयार रहना होगा। 163 करोड़ रुपये लागत के आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के तहत के तहत सीसीटीवी कैमरों तक करंट पहुंचाने के लिए जिस केबल को अंडरग्राउंड डाला जाना था, उसे नाले और नालियों में बिछाया जा रहा है। बगैर इसकी परवाह किए कि कभी नाले-नाली में पड़ी केबल कटने-फटने से करंट दौड़ा तो अंजाम क्या होगा।
विज्ञापन

आई ट्रिपल सी स्मार्ट सिटी का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जिसके तहत शहर भर के चौराहों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर नौ सौ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। ये कैमरे पूरे शहर की निगरानी करेंगे। कैमरे लगाने का कॉन्ट्रेक्ट एक एजेंसी को दिया गया है। आई ट्रिपल सी का आलीशान कंट्रोल रूम नगर निगम की नई इमारत में बनाया गया है। कैमरों को ऑपरेट करने के लिए बिजली की सप्लाई की जरूरत है जिसके लिए इस प्रोजेक्ट के तहत अंडरग्राउंड केबल भी बिछाई जानी थी लेकिन कई जगह केबल को अंडरग्राउंड करने के बजाय नालों की तली में बिछा दिया गया है।
हाल ही में पुराना शहर के डलाव वाली मठिया इलाके में अंडरग्राउंड केबल बिछाने का काम शुरू किया गया है जहां काफी बड़े हिस्से में बगैर खोदाई किए नालों की तली में ही केबल बिछा दी गई। इलाके के लोगों ने यह कहते हुए विरोध किया कि बहते हुए पानी में केबल डालने से हादसे होने का डर रहेगा लेकिन इसके बावजूद एजेंसी के लिए काम कर रहे मजदूर यह कहकर नाले में ही केबल बिछाकर लौट गए कि उन्हें ऐसे ही काम करने को कहा गया है।

अफसर भी मान रहे हैं खतरनाक है नाले में केबल डालना, फिर भी रोकटोक नहीं

आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट की शर्तों के मुताबिक इस केबल को जमीन खोदकर अंडरग्राउंड किया जाना था। इसी कारण जहां-जहां केबल बिछाई जानी है, वहां सर्वे कर ऐस्टीमेट बनाया गया था और कार्यदायी संस्था को उसके अनुरूप भुगतान भी किया गया है। इसके बावजूद नाले में केबल बिछाई जा रही है। अफसर भी इसे खतरनाक मान रहे हैं। नगर निगम के मुख्य अभियंता कहते हैं कि नाले में केबल डालने से वह जल्द खराब हो जाएगी। केबल चोरी होने और उसके कटने-फटने से हादसे होने का भी काफी खतरा रहेगा।

शुरू से विवादों में घिरी रही हैं स्मार्ट सिटी की परियोजनाएं

बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए दो हजार करोड़ से भी ज्यादा धनराशि का प्रावधान किया गया है लेकिन इसकी तमाम परियोजनाएं शुरू से विवादों से घिरी रही हैं। आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ है जिसकी डीपीआर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने बनाई थी और फिर बरेली के अफसरों पर उसमें मनमाने अनुचित बदलाव करने के आरोप लगाते हुए उसकी जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया था। सवा सौ करोड़ के घोटाले के आरोपी अफसर को गुपचुप ढंग से स्मार्ट सिटी का मिशन मैनेजर बना दिया गया था। इसके अलावा कई और परियोजनाओं में भी गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। खुद मेयर उमेश गौतम ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की थी।

लोगों ने कहा- हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार

मजदूरों को नाले में केबल डालने से मना किया था मगर उन्होंने हमारी बात नहीं मानी। नाले में हर समय पानी बहता रहता है। केबल के एक हिस्सा बिजली की लाइन से भी कनेक्ट किया गया है। इसकी वजह से कभी भी घरों में करंट दौड़ने का खतरा रहेगा। - महेश, डलाव की मठिया
विज्ञापन

इस इलाके में कुछ ही हिस्से में खोदाई करके केबल डाली गई है। बाकी ज्यादातर हिस्से में नाले की तली में केबल बिछा दी गई। लोगों ने काफी मना किया लेकिन काम करा रहे ठेकेदार ने यह बता दिया कि यह केबल नाले में ही डालने का नियम है। - सोहनलाल, डलाव की मठिया
गलियों में हर समय बच्चे खेलते रहते हैं। नाले में बिजली की केबल डाले जाने से इन बच्चों के साथ कभी भी हादसा हो सकता है। लोगों के मना करने के बावजूद ठेकेदार ने जबरन नाले में केबल डाल दी। कोई हादसा हुआ तो उसके लिए अफसर ही जिम्मेदार होंगे। - रामकली, डलाव की मठिया

इस मामले की जानकारी नहीं है। नाले में यह केबल नहीं डाली जा सकती। अगर ठेकेदार ऐसा कर रहा तो यह नियमविरुद्ध है। जांच कराकर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नाले में बिछाई गई केबल निकलवाकर अंडरग्राउंड कराया जाएगा। - भूपेश कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें