इतनी भी क्या जल्दी
रामगंगानगर के नवदीप आर्य ने बताया कि अगर किसी को भूखंड लेना हो हो तो आवेदन करने और स्थल देखने के लिए कम से कम तीन दिन चाहिए। परिवार में विचार-विमर्श में भी वक्त लगता है। ऐसे में आवेदन के लिए कम से कम 30 दिन का मौका मिलना चाहिए। तमाम लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें भूखंड रिक्त होने की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती।
राजेंद्रनगर के घनश्याम दास ने बताया कि भूखंड संबंधी आवेदन के लिए अभिलेख, रुपये आदि जुटाने होते हैं, जो 10-11 दिन में मुमकिन नहीं। ऐसे तो तमाम जरूरतमंद लोग आवेदन ही नहीं कर पाएंगे। बीडीए को चाहिए कि कम से कम माह भर का समय दे, ताकि आवेदकों की संख्या बढ़ सके।
बीडीए उपाध्यक्ष मनिकंडन ए. ने बताया कि आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों के साथ ही होटल, अस्पताल, शैक्षिक संस्थानों, साइबर सिटी, मल्टीप्लेक्स आदि के लिए भी भूखंड आरक्षित हैं। स्पोर्ट्स स्टेडियम, सेंट्रल पार्क व पार्क प्रस्तावित हैं। बीडीए प्रदेश का पहला प्राधिकरण है, जो किसानों से सहमति के आधार पर भूमि क्रय करके आवासीय योजना विकसित कर रहा है।