तीन हफ्ते से टालमटोल कर रही बीडीए की टीम बृहस्पतिवार को दलबल सहित शहर में अवैध निर्माण खोजने निकली। बीडीए सचिव की अगुवाई में इंजीनियरों की टीम दोपहर 12 बजे से लेकर शाम पांच बजे तक शहर के कई इलाकों में घूमी। इस दौरान बीते एक साल में बिना नक्शा स्वीकृत कराए होने वाले अवैध निर्माण चिह्नित किए गए। अब इनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
अमर उजाला ने 26 अक्तूबर को शहर के हर इलाके में होने वाले अवैध निर्माण संबंधी खबर ‘सील बिल्डिंग कैसे बनी, पब्लिक सब जानती है’ शीर्षक से प्रकाशित कर ऊपरी कमाई की नीति के चलते राजस्व नुकसान के प्रति बीडीए को सचेत किया था। समाचार प्रकाशित होते ही बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार ने सचिव सुरेंद्र प्रसाद, एक्सईएन मोहनलाल, एई आरके चौधरी, कमलेश त्रिवेदी, वेदपाल सिंह, अनिल कुमार, आलोक रंजन, प्रमोद कुमार शर्मा के अलावा जेई अजय गर्ग, अजय कुमार शर्मा, मोहम्मद बाकर, पीके गुप्ता, राजेश कुमार शर्मा, मोहनचंद्र सती, पारस सिंह यादव, आरपी खरे और एसपी पाल समेत स्टाफ की मीटिंग बुलाकर पूरे शहर में अवैध निर्माण का मौके पर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। इस पर बीडीए टीम ने सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह के साथ डीडीपुरम्, राजेंद्र नगर, मॉडल टाउन, डेलापीर, आईवीआरआई, इज्जतनगर, आलमगिरीगंज, पीलीभीत बाईपास, सौ फुटा रोड, कर्मचारी नगर से मिनी बाईपास पर रोड के अलावा गलियों में जाकर भी अवैध निर्माण चेक किए। एक साल में सील होने वाले अवैध निर्माण दोबारा करने वालों की भी रिपोर्ट तैयार की गई। अवैध निर्माणकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। बीडीए उपाध्यक्ष ने एक दिन पहले अवैध निर्माण की रिपोर्ट न देने पर 10 अवर अभियंताओं का वेतन रोक दिया था।
कोट
बीडीए की टीम ने शहर के कई इलाकों में भ्रमण कर अवैध निर्माण की रिपोर्ट तैयार की है। पहले जो निर्माण सील किए गए थे, उनको दोबारा कराने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव, बीडीए