जिला पंचायत के हाथ खड़े कर देने से चौबारी मेले के इंतजाम खटाई में पड़ गए हैं। बृहस्पतिवार को एडीएम (प्रशासन) एसपी सिंह ने ग्राम प्रधान के पति और अन्य ग्रामीणों से बात कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इधर, मेला प्रबंध कमेटी ने दो साल से नौ लाख रुपये के बकाया का भुगतान नहीं किया है, इससे मेले की व्यवस्थाएं नहीं हो पा रही हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर रामगंगा किनारे चौैबारी गांव के करीब 400 किसानों की जमीन पर हर साल मेला लगता है। मेले में आसपास जिलों के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। पशुओं का बड़ा नखासा भी लगता है। इसमें गौवंशीय पशुओं को छोड़ बाकी सभी जानवरों की खरीद-फरोख्त होती है। मेला गांव के ही जिम्मेदार लोग लगवाते हैं। रिटायर्ड बीडीओ जयवीर सिंह मेले के मुख्य कर्ताधर्ता हैं। उन्होंने अपनी टीम को ही मेले के इंतजाम में लगा रखा है। 30 अक्तूबर से आठ नवंबर तक मेला लगना है, लेकिन अब तक इंतजाम शुरू नहीं हो पाए हैं। डीएम ने मेला कमेटी के बजाय जिला पंचायत को मेले की व्यवस्थाएं मुकम्मल कराने की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान की वजह से जिला पंचायत ने मेला कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इधर, मेला कमेटी ने अब तक 2015 और 2016 का नौ लाख रुपये का बकाया जमा नहीं किया है। ऐसे में इस बार मेला कौन कराएगा, यही अब तक तय नहीं हो पा रहा है।
एडीएम (प्रशासन) एसपी सिंह ने एसडीएम (सदर) अनुपम शुक्ल, तहसीलदार मलखान सिंह के अलावा चौबारी की ग्राम प्रधान के पति राजीव सिंह उर्फ राजू फौजी और उनकी टीम के साथ चौबारी मेले के इंतजामों पर बात की, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। एडीएम का कहना है कि मेले के लिए कमेटी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि मेला कमेटी ने पुराना बकाया जमा नहीं किया तो प्रशासन खुद मेला कराएगा।
पहले किसानों को मिलता था हिस्सा
चौबारी की प्रधान के पति राजीव सिंह का कहना है कि पांच साल पहले मेले से होने वाली आय में किसानों को भी हिस्सा मिलता था। तहसील में बैठकर ही पैसे के बंटवारा कर दिया जाता था, लेकिन अब किसी को कुछ नहीं मिलता है। राजीव के मुताबिक, वह किसानों को उनका हक दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
मेले में विज्ञापन कराने को ऑफर दिया
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि उन्होेंने चौबारी मेले में विज्ञापन कराने के लिए शहर के उद्यमियों को ऑफर दिया है। इससे मेले की आमदनी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। जो उद्यमी मेले में विज्ञापन कराना चाहते है, उन्हें कमेटी को तय धनराशि देनी होगी।