लंबे सोच विचार के बाद आखिरकार बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने बिल्डर पिता पुत्र पर धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करा दी। बीडीए की ओर से जेई राजेंद्र सिंह ने इज्जतनगर थाने पहुंचकर उपसचिव अजय कुमार के नाम से बिल्डरों के विरुद्ध दोबारा तहरीर दी। इसमें दोनों बिल्डरों पर सीलिंग, पार्क, सड़क और बंधक जमीन को प्लाटिंग कर बचने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं इस खुलासे के बाद मकान बनाने वाले लोगों में घबराहट है।
अमर उजाला में बंधक प्लाट बेचे जाने का खुलासा होते ही बीडीए और इज्जतनगर पुलिस हरकत में आ गए। बीडीए उपसचिव अजय कुमार ने दोबारा तहरीर अपने पद नाम सहित पुलिस के पास भेजी। काफी फजीहत के बाद पुलिस ने दोनों बिल्डरों सचिन और जगमोहन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। सचिन बिल्डर जगमोहन का बेटा है। बीडीए ने तहरीर में कहा है कि सृजन टाउनशिप डेवलपर के डायरेक्टर सचिन कुमार सिंह और आशुतोष बिल्डर प्राइवेट लि के मैनेजिंग डायरेक्टर जगमोहन सिंह ने बीडीए के स्वीकृत मानचित्रों में फेरबदल कर बंधक प्लाटों, पार्क, सड़क और सीलिंग की जमीन की अवैध तरीके से प्लाटिंग कर धोखाधड़ी की। एसओ इज्जतनगर कमल सिंह यादव ने बताया कि बीडीए की तहरीर पर दोनों बिल्डरों पर धारा 420, 468 और 471 के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस इस पूरे मामले की विवेचना करेगी।
क्या हैं नियम
बीडीए जेई राजेंद्र सिंह के मुताबिक किसी भी कालोनी की प्लाटिंग में भवन निर्माण के नक्शे कुछ शर्तों के साथ स्वीकृत करता है। इसमें कालोनी में खाली प्लाट बंधक रखने की भी शर्त होती है। ये जमीन बंधक इसलिए रखवाई जाती है ताकि बिल्डर कालोनी अधूरी छोड़कर न भागे। सीलिंग या बंधक जमीन की प्लाटिंग नहीं की जा सकती।
‘दोनों बिल्डरों ने किन शर्तों पर लोगों को प्लाट बेचे। ये हम नहीं जानते। बीडीए ने अपनी ओर से दोनों पर एफआईआर दर्ज करा दी है। आगे भी हम अवैध कालोनियों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए