बरेली विकास प्राधिकरण ने शहर में नए मोबाइल टावर लगाने पर रोक लगा दी है। जो मोबाइल टावर लग चुके हैं, उन पर कार्रवाई के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। रिलायंस ने फोर जी केबिल नेटवर्क बिछाने के लिए मोबाइल टावर लगाने की इजाजत यह कहते हुए मांगी थी कि उनके टावरों से मानक से ज्यादा रेडिएशन नहीं होगा। इस संबंध में बीडीए उपाध्यक्ष ने छह सदस्यीय कमेटी बनाई है जो उनके दावों को परखेगी। रिपोर्ट सही मिलने पर ही कोई फैसला होगा।
घनी आबादी में मोबाइल टावरों के रेडिएशन से होने वाले खतरों के प्रति अमर उजाला ने आगाह किया था। तमाम टावर बिना किसी अनुमति के धड़ाधड़ लगा दिए गए थे और बीडीए चुप्पी साधे हुए था। सुर्खियां बनने के बाद बीडीए ने संबंधित इलाकों के एई और जेई से अनाधिकृत तरीके से कोई भी मोबाइल टावर न लगाने के निर्देश जारी किए थे। बीडीए ने घनी आबादी में मोबाइल टावर लगाने पर रोक लगा दी है।
बीडीए के रोक लगाने से रिलायंस पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। रिलायंस का फोरजी केबिल नेटवर्क बिछाने के लिए 105 मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 40 टावर लग चुके हैं। 65 मोबाइल टावर लगने अभी बाकी है। रिलायंस ने उपाध्यक्ष से मिलने के बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा जारी शासनादेश का हवाला देकर मोबाइल टावर पर रोक न लगाने के लिए आवेदन दिया। इस पर बीडीए उपाध्यक्ष ने छह सदस्यीय कमेटी गठित कर हफ्ते भर में रिपोर्ट मांगी है। जांच कमेटी में चीफ टाउन प्लानर महावीर सिंह, एई जहीरुद्दीन, ओपी वर्मा, जेई जितेंद्र कुमार, सुनील कुमार शर्मा और राजीव राठौर शामिल हैं। रिलायंस के कोआर्डिनेटर नवनीत सिंह का कहना है कि उनकी कंपनी फोर जी केबिल नेटवर्क बिछाने के लिए जो मोबाइल टावर लगा रही है, उनसे निकलने वाला रेडिएशन निर्धारित मानक के अनुरूप है। ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं है।
हमने अभी नए मोबाइल टावर पर रोक लगाकर एक कमेटी बना दी है। ये कमेटी शासनादेश समेत अन्य चीजों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद नए टावर लगाने पर निर्णय लिया जाएगा।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए