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प्रधानमंत्री आवास योजना-  डूडा लाभार्थी नहीं ढूंढ पाया तो बीडीए ने 40 फीसदी आवासों का निर्माण रोका

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चार हजार की जगह अभी केवल बनाए जाएंगे 2344 सस्ते आवास
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बरेली। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटी न मिल पाने के कारण बीडीए ने बिल्डरों के जरिए बनवाए जाने वाले 40 फीसदी आवासों के निर्माण पर रोक लगा दी है। इन आवासों के लिए डूडा लाभार्थी ही नहीं खोज पा रहा है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने डूडा अधिकारियों को फटकार लगाई है। साथ ही डीएम से जिला स्तरीय अधिकारियों की 15 टीमें बनाकर आवंटियों की लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
गरीबों को सस्ते आवास देने के लिए बीडीए को चार हजार प्रधानमंत्री आवास बनाकर देने हैं। बीडीए ने रामगंगा आवासीय योजना में 254 भवनों के निर्माण खुद कराए हैं। इसमें 224 का आवंटन भी हो चुका है। बाकी का लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी निर्माण एजेंसियों को 2344 अवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया गया था। इसमें एक बिल्डर को 364, दूसरे को 1500 और तीसरे को 480 आवासों का निर्माण करना हैै। यहां दिक्कत ये है कि इन आवासों के लिए लाभार्थी ही ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। इसलिए बीडीए अधिकारियों ने केवल 2344 आवास ही बनाने का फैसला लिया है। अन्य आवासों के निर्माण की फिलहाल कोई प्लानिंग नहीं है। वहीं, कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्देश पर डीएम ने लाभार्थियों के चयन के लिए 15 टीमेें बनाई हैं, जो लाभार्थियों का चयन कर बीडीए को लिस्ट देेंगे। इनका लॉटरी कराकर आवासों का आवंटन किया जाएगा।
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पहले इंफ्रा स्ट्रक्चर को लेकर उपजे विवाद से रुक गया था निर्माण
सस्ते आवास बनवा रहे बिल्डर्स और बीडीए के बीच पहले यह पेच फंस गया कि आवासीय कॉलोनियों में बिजली, पानी, सड़क सहित दूसरे इंफ्रा स्ट्रक्चर कौन पूरे कराकर देगा। निर्माण एजेंसियों का कहना था कि सरकार ने उन्हें केवल आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है, जबकि बीडीए के अधिकारियों का कहना था कि बिल्डर्स को ही जरूरी सुविधाएं भी मुहैया करानी हैं। इस पर सहमति न बनने पर बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने 14 नवंबर को तीनों निर्माण एजेंसियों के खातों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इससे इन खातों में आवास बनाने के लिए शासन से जारी हुई करीब चार करोड़ की रकम डंप हो गई थी। बाद में बिल्डरों के तैयार हो जाने के बाद करीब एक महीने के बाद खातों से रोक हटाई गई।
गुस्साए कमिश्नर ने डूडा को सर्वे से बाहर किया
पीएम आवास के लाभार्थियों के सर्वे के लिए जो टीमें बनाई गई हैं। इसमें एक जिला स्तरीय अधिकारी, एक पंचायत सेक्रेटरी और एक बीडीए के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। डूडा के सर्वे न करने पर कमिश्नर ने इस टीम से डूडा को बाहर कर दिया है।
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‘पीएम आवास के लाभार्थियों का चयन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए टीमें लगाई गई हैं। सरकार का पैसा न फंसे, इसलिए फिलहाल चार हजार की जगह 2300 आवास ही बनवाए जा रहे हैं।’
- दिव्या मित्तल, बीडीए, उपाध्यक्ष
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