बरेली। शिया समुदाय की ओर से बुधवार को ऐतिहासिक जरीदों का जुलूस अलम निकाला गया। इसमें अजादारों ने सीनाजनी, छुरियों और जंजीरों का मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। नौहाख्वानी के बीच या हुसैन या अब्बास की सदाएं बुलंद होती रहीं।
आठवीं मुहर्रम पर हजरत इमाम हुसैन के भाई हजरत अब्बास की शहादत को याद कर जरीदों का जुलूस फतेह अलीशाह काला इमामबाड़ा से मौलाना समर हैदर आब्दी की अगुवाई में निकला गया। यह किला से शबाब हैदर, इंतेसाब हैदर नकवी, नायब हैदर और मरहूम सरकार जैदी के इमामबाड़े पहुंचा, जहां अंजुमनों ने नौहाख्वानी की।
इसके बाद जुलूस बाजार संदल खां से होते हुए कई घरों और इमामबाड़ों पर रुका। जामा मस्जिद रोड इंग्लिशगंज में मौलाना सिब्ते हैदर जैदी ने तकरीर की। फिर जुलूस चिड़ीमार कुआं, जखीरा के इमामबाड़ा शबाब हुसैन जैदी, जसोली होता हुआ इमामबाड़ा फतेह निशान पहुंचा। वहां नौहख्वानी के बाद कुमार टॉकीज के निकट स्थित जज साहब के इमामबाड़ा पहुंचा।
यहां अंजुमन शमशीर-ए-हैदरी, ऑल इंडिया गुलदस्ता-ए-हैदरी ने नौहाख्वानी की। कुमार टॉकीज पर अंजुमन ऑल इंडिया गुलदस्ता-ए-हैदरी, और शमशीर ए हैदरी ने जंजीर का मातम कर जिस्म को लहुलुहान किया। यहां से जिला अस्पताल रोड, कुतुबखाना मंडी, गली मनिहारान, इमामबाड़ा सैयद हसनैन, गंदा नाला रोड, गढ़ैया, दीवानखाना, मुबारक महल होते हुआ देर रात इमामबाड़ा फतेह अली शाह पहुंचकर समाप्त हुआ।