तीन हजार परिषदीय स्कूलों में इस बार भी बच्चों के लिए किताबों का अब तक कोई बंदोबस्त नहीं हो सका है। इससे अप्रैल में शुरू होने वाले नए सत्र में बच्चे बिना किताबों के ही स्कूल जाकर पढ़ाई करेंगे। बेसिक शिक्षा विभाग इस बार भी समय से पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर नहीं है।
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में करीब तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन्हें हर साल मुफ्त किताबें देने में विभाग लापरवाही करता है। पिछले साल भी बच्चों को जुलाई, अगस्त के बाद ही पाठ्य पुस्तकें मिल सकीं थीं। बेसिक शिक्षा विभाग का यह ढर्रा इस वर्ष भी बदला नहीं है। इसे लेकर हीलाहवाली का आलम यह है कि पाठ्य पुस्तकों की डिमांड भी अब तक शासन को नहीं भेजी गई है। जबकि नया शैक्षिक सत्र शुरू होने में अब चंद रोज ही बाकी रह गए हैं। जाहिर है कि इस वर्ष भी परिषदीय स्कूल दिखावे के तौर पर भले ही समय से खुल जाएं, लेकिन बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाएगी।
अभी देरी बाद में होता है खेल
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को मुफ्त दी जाने वाली पाठ्य पुस्तकों को लेकर विभाग के सभी जिम्मेदार खमोश बैठे हैं। बाद में टेंडर देने से लेकर छात्रों की ज्यादा संख्या दर्शाकर किताबों को छपवाने का खेल चलता है। इसमें ऊपर से नीचे तक जमकर कमीशनबाजी भी होती है। बताते हैं कि आधा सत्र बीतने के बाद आने वाली तमाम किताबें या तो डंप कर दी जाती हैं या फिर उन्हें गुपचुप तरीके से रद्दी में बेच दिया है।
परिषदीय स्कूलों के बच्चों को पाठ्य पुस्तकें देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अब तक क्या तैयारी की है? इसकी समीक्षा जल्द की जाएगी। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - राघवेंद्र विक्रम सिंह, डीएम