सुन्नी बरेलवी मरकज सहित उलमा और बुद्धिजीवियों ने वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। बरेलवी उलेमा का मानना है कि यह फैसला मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों और वक्फ संस्थाओं की स्वायत्ता की जीत है। वक्फ संपत्तियों का संरक्षण, धार्मिक आजादी और सांविधानिक अधिकारों पर समझौता स्वीकार्य नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2024 की तीन धाराओं पर अंतरिम रोक लगा दी है। दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन जमात रजा मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि संगठन की ओर से अधिवक्ता रिजवान मर्चेंट, अधिवक्ता मोहम्मद ताहा, अधिवक्ता सुबैल फारूक, अधिवक्ता रंजन कुमार दुबे का पैनल सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहा था। शीर्ष अदालत का फैसला मुसलमानों के सांविधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह अधिनियम धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक स्वतंत्रता की मूल भावना को भी ठेस पहुंचाता है।
मौलाना तौसीफ रजा खां ने इसे आधी जीत बताते हुए आने वाले फैसले भी मुस्लिमों के हक में होने की उम्मीद जताई। कहा कि किसी भी व्यक्ति को वक्फ संपत्तियों पर बुरी नजर नहीं डालना चाहिए।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने क्या कहा
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट से इस तरह के फैसले की उम्मीद थी। अब वक्फ की जमीनों से भू माफिया के कब्जे हटेंगे। उससे होने वाली आमदनी गरीब और कमजोर मुसलमानों के उत्थान के लिए खर्च की जाएगी। अधिवक्ता मोहम्मद खालिद जीलानी ने भी सुप्रीम फैसले का स्वागत किया। कहा कि अब अधिनियम में ज्यादा कुछ विवादित नहीं बचा है।