सलमान मियां ने कहा कि गुरुकुल, संस्कृत पाठशाला जैसी धार्मिक संस्थाओं को भी सरकारी मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भारत सरकार मुसलमानों को मुख्य धारा में लाने की बात करती है और दूसरी तरफ हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रतीत हो रहा है कि मुसलमान छात्रों को मुख्य धारा से दूर किया जा रहा है। इससे उनका भविष्य अधर में लटक जाएगा।
वहीं संगठन से जुड़े उलमा ने कहा है कि हाईकोर्ट के फैसले से वह आश्चर्यचकित हैं। मदरसा अधिनियम किसी मौलाना ने नहीं बल्कि सरकार ने बनाया है। उन्होंने कहा है कि ये गलतफहमी है कि मदरसों में सिर्फ मजहबी शिक्षा दी जाती है, जबकि मदरसों में सभी विषय पढ़ाए जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि यहां से पढ़कर निकले छात्र आईएएस, पीसीएस और प्रोफेसर तक बन रहे हैं।