बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण और रिंग रोड के निर्माण के लिए भूअधिग्रहण के दौरान मूल्यांकन में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा हुआ था। चार माह से लगातार कारवाई चल रही है। जमीन के पेशेवर खरीदारों से सांठगांठ कर मूल्यांकन में घपलेबाजी में डीएम और कमिश्नर ने अलग-अलग जांच रिपोर्ट शासन तक भेजी है। इसमें सबसे पहले 50 करोड़ का घोटाला सामने आया था और एनएचएआई के दो अधिकारी निलंबित हुए थे। मामले की रिपोर्ट राज्य सरकार और जिला प्रशासन को भेजी गई।
सीडीओ, डीएम व मंडलायुक्त की जांच रिपोर्ट में एक के बाद एक नाम उजागर होते रहे और कार्रवाई होती रही। रिपोर्ट में दो विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारियों, पीडब्ल्यूडी के एक सहायक अभियंता, तीन अवर अभियंताओं, सेवानिवृत्त हो चुके एक अधिशासी अभियंता के साथ ही एक अमीन का नाम खोला गया। कमिश्नर की ओर से जांच कराई गई तो तार पीसीएस अधिकारी से जुड़ गए। इस रिपोर्ट को कार्रवाई की संस्तुति के साथ शासन को भेजा गया था। तभी से इस रिपोर्ट पर शासन में मंथन और परीक्षण चल रहा था। अब यह कार्रवाई की गई है।