बरेली का जरी कारोबार भी ‘कोरोना’ की चपेट में
बरेली। डिमांड में कमी आने से जरी के व्यापार पर एक बार फिर संकट गहरा गया है। सहालग के दिनों में भी कारीगर और व्यापारी खाली बैठे हैं। इस मंदी की एक बड़ी वजह कोरोना वायरस भी बताई जा रही है।
कारोबारियों के मुताबिक, जरी के लिए ज्यादातर कच्चा माल चीन के वुहान शहर से आता है, लेकिन इन दिनों वहां कोरोना वायरस का प्रकोप फैला हुआ है, जिसके चलते वहां से कच्चे माल की सप्लाई पूरी तौर से ठप है, इसी कारण बड़े व्यापारी गोदामों में पड़े माल को काफी महंगा करके बेच रहे हैं। बताते हैं कि तीन सौ रुपये किलो मिलने वाले पैकेट के दाम अब पांच सौ से छह सौ रुपये तक पहुंच गए हैं। पाइप, मोती, मोती दाना, सितारे आदि कच्चा माल महंगा होने से लहंगा, साड़ी और चुनरी के दाम भी बढ़ गए हैं। बाजार में महंगे माल का खरीदार न होने कारण व्यापार में मंदी छाई हुई है। कारीगरों का कहना है कि व्यापारी महंगा खरीदना नहीं चाह रहे हैं और माल महंगा ही मिल रहा है। ऐसे में बहुत जरूरी या ऑर्डर के माल को ही बना रहे हैं। कई कारखानों में इस समय काम नहीं हो रहा है।
कारीगरों का दर्द
व्यापार पहले से ही बहुत मंदा है। काम बहुत कम हो गया है। इधर कुछ दिनाें से चीन में कोरोना वायरस फैलने से सामान भी महंगा हो गया है। इससे नए आर्डर मिलने बंद हो गए हैं। पुराने आर्डर पर ही काम कर रहे हैं।
-फरीद खां, शाहदाना, पुराना शहर।
कोरोना वायरस का असर सामान पर पड़ा है। कढ़ाई में प्रयोग होने वाला कच्चा माल दो सौ रुपये से लेकर तीन सौ रुपये तक महंगा हो गया है। कारोबारी महंगा माल लेने से इनकार करते हैं तो फिलहाल काम ठप पड़ा है।
-जाहिर, शाहदाना, पुराना शहर।
कारोबारियों बोले
कोरोना वायरस के चलते कारीगरों ने चार से पांच सौ रुपये प्रति आइटम बढ़ा दिए हैं, लेकिन कंपटीशन में ग्राहक बढ़ा हुआ माल क्यों लेगा। इस वजह से पिछले दस दिनों से कोई माल नहीं खरीदा है। पुराना माल ही बेच रहे हैं। इससे व्यापार पर असर हुआ है।
-मोहसिन रजा खां, कुतुबखाना।
कारीगरों ने माल का भाव बढ़ा दिया है। फिलहाल व्यापार पूरी तरह से बंद है। क्योंकि व्यापार में पहले से ही मंदी और ऐसे में एक साड़ी पर तीन सौ रुपये तक बढ़ जाना बहुत बड़ा अंतर पैदा करता है। सिर्फ डिमांड करने वाले ग्राहक के लिए ही हम माल मंगा रहे हैं।
-असलम, नवाबगंज।