बरेली की आधा दर्जन से ज्यादा नदियां अतिक्रमण और पानी कम होने के चलते सूखने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। शहरी क्षेत्र में इसका फायदा बिल्उर उठा रहे हैं। किला और नकटिया नदियों की बेशकीमती जमीन पर बीडीए के संरक्षण में बिल्डर अनाधिकृत तरीके से कालोनियां काट रहे हैं। ठिरिया निजावत खां में तो नकटिया नदी की जमीन पर बीडीए से बिना नक्शा स्वीकृत कराए 25 सौ आवासों की कालोनी का निर्माण चल रहा है।
गंगा नदी में जलस्तर घटने का असर रामगंगा पर पड़ा है। रामगंगा का जलस्तर घटकर आधे से भी कम रह गया है। उत्तराखंड के बरीबरा के डैम से निकली देवरनियां (बरेली में इसे किला नदी के नाम से जानते हैं) नदी बहेड़ी और भोजीपुरा में सूखने के कगार पर है। किला ओवरब्रिज पर सपा नेता के भाई नदी की जमीन पर कालोनी का निर्माण करा रहे हैं जिससे ये नदी नाले में तब्दील हो चुकी है। बहेड़ी के दीनानगर गांव स्थित एक तालाब से निकली नकटिया नदी में नाम मात्र का पानी बचा है। शहरी क्षेत्र में नदी की लंबे समय से सफाई नहीं हुई। नाले नालियों और सीवर का प्रदूषित पानी नदी में पहुंच रहा है। पीलीभीत बाईपास और बीसलपुर रोड के अलावा ठिरिया निजावत खां में नदी की अधिकांश जमीन बिल्डरों ने दबाकर कालोनियां काट दी हैं। इससे ये नदी भी नाले में तब्दील होती नजर आ रही है। फतेहगंज पूर्वी को छूती आरिल और बहेड़ी की किच्छा नदी (जो कि बरेली के गांव पदमी में बहगुल में मिलती है) में भी पानी नाम मात्र का बचा है। फतेहगंज पश्चिमी में भाखड़ा नदी भी ग्रामीण इलाकों मेें अधिकांश जगह सूख चुकी है। भीषण गर्मी में इन नदियों के सूखने से पशु पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
‘नदियों की जमीन पर कालोनी काटना अनाधिकृत है। जेई और एई को संबंधित इलाकों में भेजकर जांच कराई जाएगी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर बिल्डरों पर कार्रवाई होगी।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए