त्रिशूल एयर बेस के 20 किलोमीटर के दायरे में वायुसेना के कलर कोडेड जोनिंग मैप लागू होने के बाद चार महीने से बीडीए ने शहर में कोई भी नक्शा पास नहीं किया है। इसका असर शहर के विकास पर पड़ने लगा है। डेवलपर्स का कहना है कि उनके सामने कई और बड़ी समस्याएं हैं जिनका समाधान न हुआ तो रियल स्टेट कारोबार धीरे-धीरे बर्बाद हो जाएगा। चार सितंबर को क्रेडाई के अध्यक्ष रमनदीप सिंह ने प्रदेश के मुख्य सचिव से मुलाकात करके डेवलपर्स की परेशानियों से उन्हें अवगत कराया। इसके बाद मुख्य सचिव ने डेवलपर्स की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए आवास विकास और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की 13 सितंबर को बैठक बुलाई है। इस बैठक में नक्शा पास होने समेत सभी मसले का कोई हल निकालने की उम्मीद है।
इन मुददों पर होगी चर्चा
मुददा-1
त्रिशूल एयरबेस से बीस किलोमीटर के दायर में करीब-करीब पूरा शहर आ रहा है। एयरबेस से 20 किलोमीटर की परिधि में कलर कोडेड जोनिंग मैप लागू होने से शहर के किसी इलाके में बीडीए के अधिकारी मकानों और प्रतिष्ठानों के नक्शे पास नहीं कर रहे हैं। पिंक जोन होने की वजह से बीस किलोमीटर इलाके में पौधारोपण तक नहीं हो सकता है। इसलिए वायुसेना से एनओसी नहीं मिल रही है। डेवलपर्स का कहना है कि यह पाबंदी पूरी तरह अव्यवहारिक है।
मुददा-2
वाराणसी की निशा कुमारी के मामले में कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग के प्रमुख सचिव सदाकान्त ने वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर बता दिया कि मानचित्र स्वीकृ ति सब डिवीजन शुल्क, पार्क शुल्क, इम्पैक्ट फीस, बंधा चार्ज आदि विधिक प्राविधानों/नियमावलियों के अभाव में अवैध है। विकास शुल्क की वसूली नियामावली के प्राविधानों के अनुसार ही होनी चाहिए। डेवलपर्स की मांग है कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू होनी चाहिए।
मुददा-3
डेवलपर्स को चार हेक्टेयर के कम हाउसिंग प्रोजेक्ट में जो दिक्कतें आ रही हैं, उससे भी अधिक जमीन के प्रोजेक्ट में आती हैं। इसलिए प्रस्ताव है कि डेवलपर्स प्रोजेक्ट में बीस फीसदी ईडब्लूएस और एलआईजी भवनों के बनवाने के बजाए सभी से शेल्टर फीस ले लें। इसके बाद आवास विकास या विकास प्राधिकरण कहीं भी उनके लिए मकान बनाकर आवंटन कर दें, क्योंकि बनाने के बाद उनका आवंटन करने में काफी दिक्कतें आती हैं।
मुददा-4
21 अक्टूबर 2016 को जारी परिपत्र में रक्षा प्रतिष्ठानों की बाहरी दीवार से 10 मीटर दूरी तक सुरक्षा प्रतिबंध लागू किए गए हैं ताकि आसपास कड़ी निगरानी की जाए। परिपत्र में दिए सेंट्रल कमान के शहरों में बरेली का नाम ही शामिल नहीं है। ऐसा लग रहा है कि यह लिपिकीय त्रुटि हुई है लेकि न इस पर किसी का ध्यान नहीं है। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय से संशोधित परिपत्र जारी कराकर स्थिति साफ कराई जाए। ताकि नक्शे पास कराने के बाद भवन बन सकें।
नक्शे पास न होने की वजह से शहर के लोगों को बड़ी दिक्कतें हो रही हैं। इसके अलावा शहर के विकास में और भी तमाम अड़चनें हैं। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के अलावा मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने हमें समस्याओं का हल निकालने का आश्वासन दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही कोई राहत मिलेगी। - रमनदीप सिंह, अध्यक्ष क्रेडाई
नक्शे पास होने में दिक्कतें तो हैं ही। एनओसी जारी होने पर ही नक्शे पास हो सकते हैं। नियमों में कुछ संशोधन आदेश जारी होने पर ही लोगों को राहत मिल पाएगी। वाराणसी विकास प्राधिकरण को शुल्क वसूली को लेेकर कोर्ट के आदेश के बाद कोई निर्देश जारी हुआ होगा। हमारे यहां भी आएगा तो लागू कर दिया जाएगा। -सुरेंद्र प्रसाद, सचिव, बरेली विकास प्राधिकरण