बेशक छात्रा ने खुद के अपहरण के आरोपी अपने प्रेमी बिलाल को अपहरण की धाराओं से बचा लिया हो लेकिन चोरी और धोखाधड़ी में उसे सलाखों से आजाद कराना उसके लिए आसान नहीं होगा। छात्रा कोर्ट में यदि बिलाल के पक्ष में भी बयान देती है तो भी फिलहाल बिलाल को जेल से रिहाई मिलने की उम्मीद कम ही है।
फरारी के बाद छात्रा से अपने पक्ष में वीडियो बयान जारी कराने से लेकर अस्पताल में उससे मेडिकल परीक्षण को इंकार कराने तक बिलाल ने कानूनी दांव पेंच का खूब इस्तेमाल किया। लेकिन बिलाल की रिहाई अब महज छात्रा के बयानों पर निर्भर नहीं रह गई।
पुलिस ने बिलाल के पास से चोरी के तीन लाख 20 हजार रुपये की बरामदगी दिखाई है। इसके अलावा उसके पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिला है। मेडिकल में अगर छात्रा नाबालिग निकलती है तो बिलाल के खिलाफ अपहरण की धारा 364 और बढ़ जाएगी।
अगर छात्रा उसके पक्ष में भी बयान दे देती है तो भी बिलाल जेल से नहीं छूट पाएगा। चोरी के मामले में बरामदगी होने की वजह से उसे आसानी से जमानत मिलना मुश्किल है। कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मामला भी उस पर भारी पड़ेगा।