चौधरी तालाब पर सुरंग का द्वार, प्राचीन मंदिर
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उपहार स्वरूप मिला था गुलाबनगर का तिवारीपुरा
समिति के अध्यक्ष रामगोपाल मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1567 में लखना स्टेट के राजा जसवंत राव ने अपनी पुत्री राजकुमारी महालक्ष्मीबाई के नाम पर रामलीला का मंचन शुरू कराया था। राजकुमारी के विवाह के बाद उनके पति वसंतराव ने परंपरा को आगे बढ़ाया। वर्ष 1920 के करीब दूसरे समुदाय के लोगों ने रामलीला में बाधा डाली थी। उस समय राजा वसंतराव ने निर्णय लिया था कि अलखनाथ अखाड़े में दोनों पक्षों की कुश्ती होगी, जो विजयी होगा उसकी बात मानी जाएगी।
उस समय ब्राह्मण परिवार के तीन सगे भाइयों ने प्रतियोगिता को जीता था। राजा ने उपहार स्वरूप उन्हें गुलाबनगर का तिवारीपुरा दिया था। 457 वर्ष के इतिहास के पीछे वजह यह है कि समिति में युवाओं को भागीदार बनाया जाता है, जो परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। इस समय भी पांच से दस युवा समिति में जुड़े हुए हैं। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार भी पूर्व में इस समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने 15 साल तक जिम्मेदारी निभाई।