सबूत न मिलने पर भाई को छोड़ा
शुरू में बरेली में घर पर दबिश देकर इनामुल और उसके भाई मुनीर को एटीएस पकड़कर लखनऊ ले गई थी। वहां पड़ताल में मुनीर का कोई भूमिका नहीं मिली तो उसे तुरंत ही छोड़ दिया गया। इनामुल के पिता नूरल हक पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में कर्मचारी थे। उनकी मौत के बाद इनामुल के भाई फरीद को उनकी जगह नौकरी मिल गई। तब इनामुल का शुरुआती समय पंतनगर में ही बीता।
इनामुल हक अपनी फेसबुक आईडी के कवर पेज पर मारे गए आतंकी जाकिर मूसा की स्टाइल में अंगुली उठाए था। उस वक्त एटीएस के हवाले से जानकारी मिली कि उसने जाकिर मूसा का नाम लेने पर उसे शहीद भाई बताया। कहा, जाकिर से सीधा कोई संपर्क नहीं रहा, पर वह शहीद भाई का बहुत एहतराम करता है। इनामुल की कुछ और आईडी थीं जो एटीएस ने ब्लॉक कर दी, इसलिए आईडी में ज्यादा डिटेल और मेसेज नहीं मिले।
पंतनगर में दंगा भड़काने में गया था जेल
इनामुल हक को पकड़ने से पहले एटीएस को इंटरनेट पर युवाओं को भड़का रहे मोहम्मद शोएब उर्फ अबू मोहम्मद अल हिंदी नाम के शख्स की तलाश थी। गिरफ्तारी के बाद पता लगा कि यह सब इनामुल के ही उपनाम हैं। अलकायदा से जुड़े साहित्य के अलावा उसकी पंतनगर के पते से बनी एक फेसबुक आईडी का पता चला। जांच में पता लगा कि पंतनगर में दंगा भड़काने में उसे कुछ दिन जेल में काटने पड़े थे। इसके बाद वह बरेली चला आया। उसकी प्रोफाइल में अलकायदा का झंडा लगा था।