गौसगंज गांव में बनाई गई पुलिस चौकी
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे पक्ष के लोगों में आक्रोश
दूसरी ओर दूसरे पक्ष के लोगों में पुलिस द्वारा समुदाय विशेष के परिवारों को बसाने पर आक्रोश दिखा। उनका कहना है कि पूर्व प्रधान हीरालालने बताया कि चार माह से उनकी किसी मांग पर पुलिस व अन्य प्रशासन के लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। ना ही उनको लाइसेंस प्रदान किया गया है। ना ही मृतक बेटे की पत्नी को सरकारी नौकरी दी गई है। ऐसे में दूसरे समुदाय के लोग से सामंजस्य बन पाना मुश्किल है।
ये है मामला
19 जुलाई को हुए सांप्रदायिक बवाल में पूर्व प्रधान हीरालाल के पुत्र तेजपाल की मौत हो गई थी और दर्जनभर लोग घायल हुए थे। इसमें पूर्व प्रधान हीरालाल की तहरीर पर दूसरे समुदाय के 50 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद से आरोपी गांव छोड़कर चले गए थे। इस मामले में फिलहाल, करीब 50 लोग जेल में बंद हैं।