बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने डेलापीर चौराहे पर बरेली की पहचान के तौर पर लटकाए जाने वाले झुमके की डिजाइन तय कर ली है। झुमके की डिजाइन की 28 प्रविष्टियों में रजनीश अग्रवाल की प्रविष्टि को श्रेष्ठ पाया गया। चयनित डिजाइन में डेलापीर की रोटरी का मुख्य फोकस झुमके पर होगा। लैंडरकेप में जरदोजी और सुरमादानी के प्रतीक चिह्न भी मौजूद रहेंगे। 10 लाख की लागत से बनाया जाने वाला झुमका फाइबर ग्लास से निर्मित होगा जिस पर मीनाकारी की अदाकारी झलकेगी। फिल्म ‘मेरा साया’ में आशा भोंसले का गाया और अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया गीत ‘झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में’ से प्रेरणा लेकर बीडीए ने बरेली को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर झुमके के शहर की पहचान दिलाने की योजना बनाई थी। इसके लिए डेलापीर चौराहे पर रोटरी बनाकर डीडीपुरम तक आदर्श रोड बनाने का काम चल रहा है। डेलापीर चौराहे की रोटरी में झुमका की डिजाइन के लिए प्रविष्टियां मांगी गई थी। बीडीए को बरेली समेत अन्य शहरों से झुमके की अलग-अलग डिजाइन की 28 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। प्राधिकरण के निर्णायक मंडल ने आर्किटैक्ट राजनीश अग्रवाल की प्रविष्टि को श्रेष्ठ घोषित किया। अब इसी डिजाइन का झुमका जरदोजी और सुरमादानी के प्रतीक चिह्नों के साथ डेलापीर चौराहे की रोटरी पर स्थापित होगा। लैंडर स्कोप में विभिन्न तरह की लाइटें जगमगाएंगी। रात में लाइटों का कलर अलग से चमकेगा। ये बाहर से आने वाले पर्यटकों को बरेली की पहचान के रूप में आकर्षण का केंद्र रहेगा।
‘बरेली का झुमका न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा बल्कि ये रुहेलखंड क्षेत्र में हैंडीक्राफ्ट के काम में लगे कारीगरों की कार्यकुशलता पर फोकस करते हुए इस क्षेत्र में प्रेरणा का काम भी करेगा।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर