तहसीलदार ने भी परीक्षण किए बिना उसे अपर आयुक्त को भेज दिया। इसके आधार पर फरवरी 2026 में संतराम के वारिसान के पक्ष में फैसला हो गया। अपर आयुक्त के आदेश की प्रति की फोटो कॉपी के आधार पर ही खतौनी पर जमीन वारिसान के नाम दर्ज कर दी गई।
ऐसे खुला मामला
दो मई को नवाबगंज तहसील में आयोजित समाधान दिवस में ज्योरा मकरंदपुर के प्रधान रवि बाबू, लालाराम और सूरजपाल ने शिकायतीपत्र देकर जिलाधिकारी अविनाश सिंह को प्रकरण से अवगत कराया। डीएम के आदेश पर एसडीएम नवाबगंज उदित पवार ने जांच कराई तो अपर आयुक्त को गलत रिपोर्ट भेजने, अभिलेखों से छेड़छाड़ करने और आदेश की फोटो कॉपी के आधार पर खतौनी में नाम दर्ज करने की पुष्टि हुई। एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने रविवार को तीनों पर कार्रवाई की।