बरेली। लॉकडाउन में शहरों में सरकार की ओर से निजी निर्माण कार्य कराने की इजाजत नहीं हैं लेकिन इसके बदायूं रोड स्थित एक प्लॉट के विवाद में सुभाषनगर पुलिस एक पक्ष को कब्जा दिलाने पहुंच गई। प्रशासनिक अफसरों से इजाजत लिए बिना ही पुलिस ने अपनी मौजूदगी में ही यहां निर्माण भी शुरू करा दिया।
शहर के अनिल अग्रवाल का बदायूं रोड पर रविंद्र नगर गेट के पास स्थित सात सौ गज के प्लाट को लेकर पड़ोसी सीमेंट कारोबारी नरेश गुप्ता से विवाद चल रहा था। बृहस्पतिवार को अनिल अग्रवाल ने नरेश गुप्ता का सामान हटवाकर निर्माण शुरू कराया तो विवाद शुरू हो गया। परिवार के लोगों के साथ पहुंचे नरेश गुप्ता ने हंगामा शुरू कर दिया। दोनों पक्षों में तीखी झड़प हुई। सूचना पर सुभाष नगर पुलिस आ गई। नरेश जमीन का कोई कागज नहीं दिखा सके तो तर्क दिया कि उन्होंने जिला जज के यहां अपील कर रखी है। अनिल अग्रवाल ने व्यवहार न्यायाधीश प्रवर वर्ग का 15 जुलाई का आदेश दिखाया जिसमें नरेश गुप्ता बतौर वादी केस हार गए थे। अदालत ने संपत्ति अनिल अग्रवाल की बताकर निर्माण कराने का इजाजत दी हुई थी। पुलिस ने नरेश गुप्ता पक्ष को चेतावनी देते हुए एक तरफ हटा दिया और अनिल अग्रवाल को निर्माण कराने को कह दिया। नरेश गुप्ता ने इसके बाद थाने से लेकर एसडीएम सदर तक कई अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे लेकिन शाम तक निर्माण कार्य चलता रहा।
जमीन चीनी मिल की नहीं है। शुक्ला परिवार से हमने खरीदी है। निर्माण काफी पहले हो जाता पर गुप्ता हर बार अड़ंगा लगाए रहे। वह कई बार केस हार चुके हैं। अब फिजूल के आरोप लगा रहे हैं। अधिकारियों से सब कागजात देख लिए हैं। -अनिल अग्रवाल, एक पक्ष
जमीन चीनी मिल की है। वर्ष 1992 से उनके घर के परनाले, खिड़कियां इधर निकल रहे हैं और वह खाली पड़ी इस जगह पर तीस साल से सीमेंट-बजरी का भी कारोबार चला रहे थे। चीनी मिल जब चाहे जमीन खाली करा ले लेकिन अनिल अग्रवाल का इस जमीन से कोई वास्ता नहीं है। लॉकडाउन में पुलिस प्रशासन के अफसरों से सांठगांठ कर युद्धस्तर पर निर्माण कराया जा रहा है। एसडीएम सदर ने उनकी शिकायत पर सुभाषनगर पुलिस से लॉकडाउन तक निर्माण न होने देने को कहा मगर पुलिस ने काम और तेज करा दिया। - नरेश गुप्ता
सुबह मामला जानकारी में आया था। सुभाषनगर पुलिस से जांच कराई तो पता लगा कि संपत्ति अग्रवाल पक्ष की ही है। लॉकडाउन में निर्माण जायज है या नहीं, इसकी जांच कराएंगे। नाजायज होगा तो निर्माण रोका जाएगा। - रविंद्र कुमार, एसपी सिटी
हमने जो जांच कराई उसके मुताबिक संपत्ति अनिल अग्रवाल की ही है लेकिन लॉकडाउन में इस पर निर्माण नहीं कराया जा सकता। पुलिस को निर्देश दिए हैं कि फिलहाल निर्माण रुकवा दिया जाए। लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही निर्माण कराया जाए। -ईशान प्रताप सिंह, एसडीएम सदर
नरेश गुप्ता ने सड़क की साइड से आड़ कर गुपचुप निर्माण करा लिया था। अंदर सीमेंट व बजरी रखने लगे। जब अनिल अग्रवाल को इसकी जानकारी हुई तो वह निर्माण हटाने पहुंचे। अग्रवाल ने सिर्फ सड़क की साइड में दीवार लगाई है ताकि बजरी सीमेंट के ट्रक अंदर न जा सकें। - इंस्पेक्टर सुभाषनगर
डीसीबी चेयरमैन की पत्नी और दो गार्ड समेत हुई थी हत्या
पहले यह संपत्ति नेकपुर सहकारी चीनी मिल की बताई जाती थी जिसे तत्कालीन डीसीबी चेयरमैन त्रिलोकी और कांग्रेस की नेता उनकी पत्नी कमलेश शुक्ला अपनी बताते थे। इस संपत्ति के साथ कुछ और संपत्तियों पर उनका कुछ लोगों से विवाद भी हुआ था। कई साल पहले पति पत्नी के साथ उनके दो सुरक्षाकर्मियों की भी हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि कमलेश शुक्ला के बेटे योगेंद्र औप पवन शुक्ला ने बी करीब आठ साल पहले प्लॉट अनिल अग्रवाल को बेच दिया था।