भीख मांगने वाली महिला बच्चों के लिए खाना बनाने पहुंची थी रोडवेज अड्डे पर
बरेली। अपने बच्चों को खाना बनाकर खिलाने के लिए रोडवेज परिसर के एक कोने में ईंटों का चूल्हा जोड़ रही एक भिखारी महिला की अचानक तेज खांसी उठने के बाद वहीं जमीन पर गिरकर मौत हो गई। घबराए बच्चों की चीख सुनकर भीड़ इकट्ठी हुई लेकिन फौरन ही कोरोना के खौफ से दूर हट गई। रोडवेज के गार्ड की सूचना पर पहुंची पुलिस ने बेटे से ही महिला का शव का उठवाकर एंबुलेंस में रखवाकर जिला अस्पताल पहुंचवा दिया।
इन दिनों खाली पड़ा रहने वाला पुराना रोडवेज परिसर आसपास इलाकों में भीख मांगने वालों का ठिकाना बन गया है। गोल मार्केट में छप्पर के नीचे रहने वाली 35 वर्षीय शाजिया ने भी बच्चों के साथ यहां ठिकाना बना रखा था। अक्सर यहीं ईंटों का चूल्हा बनाकर बच्चों के लिए खाना भी यहीं बना लेती थी। शनिवार दोपहर शाजिया दो बेटियों और एक बेटे के साथ यहां पहुंची लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ गई। तेज खांसी उठने के बाद वह छाती पर हाथ रखे हुए अचानक जमीन पर गिर पड़ी।
महिला के बच्चे गोल मार्केट में रहने वाले अपने चाचा मोहम्मद हसीन को बुलाने दौड़ पड़े। हसीन आकर शाजिया की नब्ज देखी तो वह मर चुकी थी। हसीन ने बताया कि शाजिया कुछ दिनों से बीमार थी। नकटिया की एक मजार पर इलाज भी करा रही थी। उसे बुखार, खांसी और जुकाम की शिकायत थी।
किसी ने हाथ नहीं लगाया, स्वास्थ्य विभाग से कोई पहुंचा तक नहीं
पुलिस ने एंबुलेंस तो बुलाई लेकिन किसी ने महिला के शव को हाथ नहीं लगाया। हसीन की मदद से बेटे शोएब ने शव उठवाकर एंबुलेंस में लादा। फिर उसे जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया गया। कोरोना के दौर में संदिग्ध मौत होने के बावजूद मौके पर मेडिकल टीम को नहीं बुलाया गया। पास ही एसपी सिटी, सीओ सिटी व कोतवाली होने के बावजूद कोई अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा। महिला की मौत के बाद बच्चों ने उसके शव को चादर में लपेट दिया। फिर तीनों उससे लिपटकर रोने लगे।
आटा गूंथकर भिंडी काटी थी कि मौत आ गई
शाजिया की बेटी गुलफ्शा ने बताया कि उसकी मां ने वहां पहुंचकर आटा गूंथने के बाद भिंडी काटी थी और उसके बाद चूल्हा जलाने जा रही थी। इसी बीच मां की हालत बिगड़ गई। इसके बाद सारा सामान वैसे ही छोड़कर वे लोग मां को उठाने की कोशिश करने लगे।