भारतीय भू-वैज्ञानिक सोसायटी के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद के सदस्य पद्मश्री प्रो. हर्ष कुमार गुप्ता ने बरेली को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन में बताते हुए यहां के लोगों को भवन सुरक्षा मानक हर हाल में अपनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि अगर आठ रिक्टर स्केल पर भूकंप आया तो बरेली में 30 से 40 हजार लोगों की मौत हो सकती है, इसलिए बेहतर है बरेली के लोग इससे निपटने के लिए पहले से ही सुरक्षा इंतजाम कर लें। उन्होंने कहा कि भूकंप को न तो रोका जा सकता है, न ही उसका पूर्वानुमान फिलहाल लगाया जा सकता है, सिर्फ बिल्डिंग सुरक्षा उपाय करके ही इससे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। इसके लिए भवनों के निर्माण में भूकंपरोधी मानकों का पालन किया जाए तो काफी हद तक जनहानि कम होगी।
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्रो. गुप्ता मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादातर भूकंप टैक्टोनिक प्लेट में होने वाली हलचलों के कारण आते हैं, क्योंकि भारत इसी के ऊपर बसा है, इसलिए खतरा और बढ़ जाता है। लेकिन इन हलचलों का आकलन संभव नहीं है, लेकिन शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस टैक्टोनिक प्लेट का हिस्सा आयरलैंड में सतह के करीब है।
उन्होंने कहा कि हिमालय का जोन भूकंप के लिहाज से सबसे खतरनाक है। इसके किसी भी केंद्र में भूकंप आने पर डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी पर तबाही हो सकती है। ऐसे में उत्तराखंड से सटा होने से बरेली बेहद संवेदनशील है। हालांकि पिछले सौ सालों में बरेली में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, लेकिन यह मान लेना कि जिन स्थानों पर कभी भूकंप नहीं आया, वहां भूकंप नहीं आ सकता, गलत साबित हो चुका है। हाल के कुछ वर्षों में जहां भूकंप आए, उनमें से कई हिस्सों में पिछले सौ वर्षों में भूकंप नहीं आए थे। प्रो. हर्ष गुप्ता ने बताया कि भूकंप के पूर्वानुमान का अभी तक कोई तरीका नहीं निकला है, लेकिन इस दिशा में काम चल रहा है। कोयना, महाराष्ट्र में भूकंप के पूर्वानुमान पर काम किया जा रहा है। वहां एक निर्धारित स्थल पर भूकंप आते हैं, इसकी मानीटरिंग की जा रही है। उम्मीद जगी है कि अगले 8-10 साल में भूकंप का पूर्वानुमान किया जा सकेगा और ऐसा हुआ तो यह बहुत बड़ी कामयाबी होगी।