बड़ा सवाल... कैसे लीक हुआ डाटा
स्नातक और परास्नातक में प्रवेश के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद कॉलेज में उस फॉर्म का प्रिंट व निर्धारित शुल्क जमा किया जाता है। इसके बाद कॉलेज इसे अपनी लॉगिन आईडी से वेरिफाई करके विश्वविद्यालय को फॉरवर्ड करता है। कॉलेज की लॉगिन आईडी का ही घपले में इस्तेमाल किया गया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लॉगिन आईडी व पासवर्ड किसी बाहरी को कैसे मिला? माना जा रहा है, कॉलेज का स्टाफ भी इसमें शामिल है। जालसाजों ने फार्मों को विश्वविद्यालय फारवर्ड करके फीस अपने पास रख ली। आरोपी छात्र के पकड़े जाने के बाद प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने विश्वविद्यालय को जानकारी दी। गंभीर प्रकरण होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेज का आईडी पासवर्ड बदल दिया है।
जालसाजों का अड्डा बने कैफे
बरेली कॉलेज के आसपास बड़ी संख्या में साइबर कैफे खुले हैं। यहां सुबह से शाम तक विद्यार्थियों की भीड़ रहती है। यहीं जालसाज व शरारती तत्व जमा रहते हैं और विद्यार्थियों से प्रवेश के लिए परेशान न होने की बात कहकर रकम ऐंठ लेते हैं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि नगर निगम को कई बार बाहर अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखा गया है, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
बरेली कॉलेज के प्रोफेसर ओपी राय ने बताया कि फर्जी रसीद देने वाला नितिन कॉलेज में बीएससी तीसरे सेमेस्टर का छात्र है। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। कॉलेज का पासवर्ड आईडी करीब पांच वर्ष से नहीं बदला गया था। अब इसे प्रतिदिन बदला जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय से भी सिर्फ कॉलेज से फॉरवर्ड किए फॉर्म पर ही प्रवेश देने के लिए पत्र लिखा गया है।