बरेली। करीब 27.30 करोड़ रुपये के बकाया टैक्स को लेकर नगर निगम और बरेली कॉलेज के बीच चल रहे लंबे विवाद का समाधान हो रहा है। यह खबर कॉलेज के हजारों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए दिवाली के तोहफे से कम नहीं है। कॉलेज के 38 खाते सीज होने से ठप पड़े रिसर्च वर्क और कई गतिविधियों के जल्द ही सामान्य होने की उम्मीद है। प्राचार्य और कॉलेज प्रबंध समिति सचिव की नगर आयुक्त और महापौर से हुई निर्णायक मुलाकात के बाद समाधान सामने आया है जिसमें बकाया टैक्स के आकलन के लिए दोबारा पैमाइश कराने पर सहमति बन गई है।
- शैक्षणिक कार्य हो रहे थे प्रभावित
वर्ष 1837 में स्थापित और हेरिटेज बिल्डिंग का दर्जा रखने वाले बरेली कॉलेज पर नगर निगम ने वर्ष 1998 से 27.30 करोड़ रुपये का भवन, जल और सीवर शुल्क बकाया बताया था। यह बकाया राशि कॉलेज की वित्तीय क्षमता से कहीं अधिक थी। इसके चलते निगम ने कॉलेज के 38 बैंक खाते सीज कर दिए थे। खातों के फ्रीज होने से शैक्षिक सत्र 2024-25 का संचालन मुश्किल हो गया था। रिसर्च कार्य, शिक्षकों के वेतन संबंधी मामले, कई शैक्षिक परियोजनाएं और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं जिससे छात्र-छात्राएं और कॉलेज प्रशासन समस्याओं का सामना करना कर रहा है।
- दोबारा पैमाइश पर बनी सहमति, खुली राह
समस्या के समाधान के लिए प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने महापौर उमेश गौतम से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने लचीला रुख अपनाया। प्राचार्य ने टैक्स का पुनर्निधारण करने की मांग की जिस पर महापौर ने मानवीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कॉलेज परिसर की दोबारा पैमाइश कराने का आश्वासन दिया। उन्होंंने स्पष्ट किया कि नई पैमाइश के बाद जो भी संशोधित और निर्धारित टैक्स राशि बनेगी उसे जमा करने के तुरंत बाद कॉलेज के सीज खाते खोल दिए जाएंगे। अब अंतिम निर्णय यह हुआ है कि दीपावली के त्योहार के ठीक बाद प्राचार्य और नगर आयुक्त एक अंतिम वार्ता करेंगे। इस वार्ता में नई पैमाइश की रिपोर्ट पर मंथन किया जाएगा और निर्धारित टैक्स राशि जमा करने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही कॉलेज के सीज खाते खोल दिए जाएंगे। संवाद