बरेली। बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के शोधार्थी कॉलेज परिसर में मौजूद पेड़ों का अध्ययन कर रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर तैयार डाटाबेस का भविष्य में कॉलेज के शोधार्थी व अन्य विद्यार्थी इस्तेमाल कर सकेंगे।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शालिनी सक्सेना ने बताया कॉलेज परिसर के सभी पेड़-पौधों का पहचान, प्रलेखन (डॉक्यूमेंटेशन) और डीएनए बारकोडिंग के आधार पर अध्ययन किया जा रहा है। इससे पहले इस तकनीक का बरेली में इस्तेमाल नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि कॉलेज परिसर में कई प्रकार के पौधों की प्रजातियां मौजूद हैं। डीएनए का अध्ययन प्रयोगशाला में ही किया जाएगा। प्रयोगशाला में पर्याप्त उपकरण हैं।
उपयोगी साबित होगा डाटाबेस
2023 में फलियों पर अध्ययन कर चुके डॉ. विनय ने बताया पौधों की डीएनए स्तर की जानकारी आमजन को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाती है। इसके साथ ही औषधीय पौधों, हर्बल दवाओं, संरक्षित पेड़ों की प्रजातियों को बचाने के काम भी ये आती है।
ये है डीएनए बारकोडिंग
अब तक पौधों की पहचान उनके फूल, पत्ती या फल जैसे बाहरी विशेषताओं पर निर्भर होती थी। हालांकि, जब पौधे के सिर्फ बीज, पाउडर या प्रसंस्कृत हिस्से उपलब्ध हों तो यह पहचान लगभग असंभव हो जाती है। डीएनए बारकोडिंग, प्रजाति की पहचान के पारंपरिक तरीकों से कहीं अधिक तेज, सटीक और सरल है। डीएनए बारकोडिंग से पौधे के किसी भी हिस्से (चाहे वह सूखा पत्ता हो, पाउडर हो, या प्रोसेस्ड जूस) से डीएनए निकालकर उसकी सटीक प्रजाति का पता लगाया जा सकता है। संवाद